Sat Bhakti Sandesh
Kabir is god
13/05/2026
माया काली नागिनी, अपने जाये खात।
कुण्डली में छोडे नहीं, सौ बातों की बात।।
अर्थ: जिस प्रकार नागिन अपने ही बच्चों को खा जाती है, उसी प्रकार माया (धन, सांसारिक सुख, रिश्ते-नाते) जीव को मोह में फंसाकर उसके आध्यात्मिक जीवन का नाश कर देती है माया रुपी नागिन जीव को कर्मों के जाल (जन्म-मरण की कुंडली) में जकड़े रहती है। यह अटल सत्य है कि जब तक जीव सतलोक (सच्चे सुख) में नहीं जाता, वह इस कर्म चक्र से बाहर नहीं निकल सकता।
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