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14/06/2026
लंका युद्ध और रावण वधभीषण युद्ध: राम की वानर सेना और रावण के राक्षसों के बीच भयंकर युद्ध छिड़ गया। कुंभकर्ण और मेघनाद जैसे शक्तिशाली राक्षस मारे गए। युद्ध के दौरान जब लक्ष्मण को शक्ति बाण लगा, तब हनुमान जी संजीवनी बूटी लेकर आए। रावण का अंत: अंत में भगवान राम और रावण के बीच महायुद्ध हुआ। विभीषण की मदद से राम को रावण की नाभि में अमृत होने का रहस्य पता चला। भगवान राम ने अग्निबाण चलाकर रावण का वध कर दिया और अधर्म पर धर्म की पताका फहराई। . विभीषण का राज्याभिषेक और अयोध्या वापसीसीता जी की अग्निपरीक्षा: रावण के वध के बाद विभीषण को लंका का नया राजा बनाया गया। इसके बाद माता सीता की शुद्धि की पुष्टि के लिए अग्निपरीक्षा हुई।पुष्पक विमान से वापसी: 14 वर्ष का वनवास पूरा होने पर भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण, हनुमान और विभीषण के साथ पुष्पक विमान में बैठकर वापस अयोध्या लौटे। दीपावली की शुरुआत: अयोध्या वासियों ने अपने प्रिय राजा के लौटने की खुशी में पूरी नगरी को घी के दीयों से सजाया। इसी दिन की याद में हर साल दीपावली का त्योहार मनाया जाता है। अयोध्या पहुँचने पर श्री राम का भव्य राज्याभिषेक हुआ और रामराज्य की शुरुआत हुई।
14/06/2026
लोंगेवाला का युद्ध (Battle of Longewala) भारत-पाकिस्तान के बीच 1971 के युद्ध के दौरान राजस्थान के जैसलमेर जिले में थार रेगिस्तान की एक सीमा चौकी पर लड़ा गया था। यह इतिहास की सबसे गौरवशाली और रणनीतिक लड़ाइयों में से एक मानी जाती है, जहां भारतीय सेना के मात्र 120 जवानों ने पाकिस्तान के 2,000 से अधिक सैनिकों और 45 टैंकों के काफिले को धूल चटा दी थी। इस अद्भुत वीरता पर मशहूर बॉलीवुड फिल्म 'बॉर्डर' (Border) भी बनी है।इस ऐतिहासिक युद्ध की पूरी कहानी नीचे दी गई है:1. पाकिस्तान की योजना और घमंडहमले का मकसद: 1971 में जब पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) में युद्ध चल रहा था, तो पाकिस्तान ने भारत का ध्यान भटकाने के लिए पश्चिमी सीमा पर हमला करने की योजना बनाई।लक्ष्य: पाकिस्तानी सेना का लक्ष्य लोंगेवाला चौकी पर कब्जा कर रामगढ़ और फिर जैसलमेर हवाई अड्डे को अपने नियंत्रण में लेना था।अहंकार: पाकिस्तानी ब्रिगेडियर तारिक मीर इतने आत्मविश्वास में थे कि उन्होंने अपने सैनिकों से कहा था, "हम नाश्ता लोंगेवाला में करेंगे, दोपहर का खाना रामगढ़ में और रात का खाना जैसलमेर में खाएंगे।"2. आधी रात का सरप्राइज अटैक (4-5 दिसंबर 1971)अचानक हमला: 4 दिसंबर 1971 की आधी रात को, पाकिस्तान की पूरी इन्फैंट्री ब्रिगेड और चीनी टी-59 व शेरमैन टैंकों की रेजिमेंट ने लोंगेवाला पोस्ट पर अचानक हमला बोल दिया।भारतीय जांबाज: इस पोस्ट पर भारतीय सेना की 23 पंजाब रेजिमेंट की 'ए' कंपनी तैनात थी, जिसकी कमान मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी के हाथों में थी। उनके पास भारी हथियारों के नाम पर सिर्फ एक जीप-माउंटेड आरसीएल (RCL) गन थी।3. मेजर चांदपुरी का साहसिक फैसलापीछे हटने से इनकार: जब मेजर चांदपुरी ने मुख्यालय से संपर्क किया, तो सीनियर अधिकारियों ने उन्हें दो विकल्प दिए: या तो वे पोस्ट छोड़कर पीछे हट जाएं, या सुबह वायुसेना की मदद मिलने तक मोर्चा संभाले रखें।वीरता का परिचय: चांदपुरी ने पीछे हटने के बजाय लड़ने का फैसला किया। उन्होंने रणनीतिक सूझबूझ दिखाते हुए अपने 120 जवानों को रेत के टीलों पर ऐसी जगहों पर तैनात किया, जिससे दुश्मन को उनकी सही संख्या का अंदाजा न लग सके।4. रेगिस्तान की रेत बनी कालरेत में फंसे टैंक: जब पाकिस्तानी टैंक आगे बढ़े, तो वे लोंगेवाला की ढीली और सूखी रेत (धोरों) में बुरी तरह फंस गए।भैरो सिंह का शौर्य: बीएसएफ (BSF) के जवान भैरो सिंह राठौड़ (जिनका किरदार फिल्म बॉर्डर में सुनील शेट्टी ने निभाया था) ने अपनी मशीन गन से पाकिस्तानी पैदल सेना को आगे बढ़ने से रोके रखा।रात भर मुकाबला: भारतीय जवानों ने पूरी रात अपनी छोटी गन और मोर्टार की मदद से दुश्मन को उलझाए रखा और एक इंच भी आगे नहीं बढ़ने दिया।5. सुबह 'हंटर' विमानों का तांडववायुसेना की एंट्री: जैसे ही 5 दिसंबर की सुबह सूरज उगा, भारतीय वायुसेना के हॉकर हंटर (Hawker Hunter) लड़ाकू विमानों ने जैसलमेर एयरबेस से उड़ान भरी। (रात में इन विमानों के पास नाइट-विजन क्षमता न होने के कारण ये उड़ान नहीं भर सकते थे)।टैंकों का कब्रिस्तान: वायुसेना के पायलटों ने आसमान से नीचे फंसे पाकिस्तानी टैंकों पर अचूक निशाने लगाए। देखते ही देखते पूरा लोंगेवाला क्षेत्र पाकिस्तानी टैंकों का कब्रिस्तान बन गया।युद्ध के परिणाम और नुकसाननुकसान का विवरणभारतीय सेना 🇮🇳पाकिस्तानी सेना 🇵🇰सैनिकों की शहादत/मौतकेवल 2 सैनिक200 से अधिक सैनिक ढेरनष्ट हुए टैंकशून्य36 टैंक नष्ट या जब्तसैन्य गाड़ियां1 एंटी-टैंक गन नष्ट500 से अधिक गाड़ियां तबाहपाकिस्तानी सेना अपने वाहन और टैंक छोड़कर पैदल ही सीमा पार भाग खड़ी हुई। इस ऐतिहासिक जीत के लिए मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी को भारत के दूसरे सबसे बड़े वीरता पुरस्कार 'महावीर चक्र' (Mahavir Chakra) से सम्मानित किया गया। आज भी जैसलमेर के लोंगेवाला वॉर म्यूजियम में उस युद्ध में तबाह किए गए पाकिस्तानी टैंक गौरव के प्रतीक के रूप में रखे हुए हैं।
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