Trishakti Durga Maa
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19/11/2025
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64 योगिनियों के नाम और उनके कार्य .......
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64 योगिनियां तांत्रिक परंपरा में शक्ति की विभिन्न रूपों की देवी मानी जाती हैं ...
योगिनियां विशेष रूप से भारत के हीरापुर, रानीपुर-झरियाल, और खजुराहो जैसे मंदिरों में पूजी जाती हैं ...
योगिनियां देवी शक्ति के विभिन्न पहलुओं का प्रतिनिधित्व करती हैं और इनमें अलौकिक शक्तियां होती हैं, जैसे प्रकृति पर नियंत्रण, परिवर्तन, और रक्षा ...
१-१६ (प्रथम समूह)
1. माया योगिनी – माया और भ्रम की देवी
2. तारिणी योगिनी – सुरक्षा और मार्गदर्शन करने वाली
3. वायु योगिनी – वायु और हवा पर नियंत्रण
4. मार्जरी योगिनी – फुर्ती और चपलता
5. चार्चिका योगिनी – योद्धा देवी
6. कौमारी योगिनी – ज्ञान और युवा शक्ति
7. भैरवी योगिनी – उग्र और भयावह शक्ति
8. छिन्नमस्ता योगिनी – आत्म-बलिदान और कुंडलिनी शक्ति
9. ज्वाला योगिनी – अग्नि तत्व की देवी
10. विकटा योगिनी – विकराल रूप वाली देवी
11. शंखरी योगिनी – शंख से संबंधित देवी
12. कपालिनी योगिनी – खोपड़ी धारण करने वाली संन्यासिनी
13. धूमावती योगिनी – वैराग्य और तपस्या की देवी
14. बगलामुखी योगिनी – शत्रुओं का नाश करने वाली
15. वाराही योगिनी – वराह स्वरूप, युद्ध की देवी
16. सिद्धिदात्री योगिनी – सिद्धियां प्रदान करने वाली
१७-३२ (द्वितीय समूह)
17. रक्ता योगिनी – युद्ध ऊर्जा की देवी
18. गांधारी योगिनी – सुगंध और इत्र की देवी
19. महोदरी योगिनी – सृजन की देवी
20. कामिनी योगिनी – आकर्षण और इच्छा की देवी
21. चामुंडा योगिनी – चंड-मुंड राक्षसों की संहारक
22. लंबिनी योगिनी – लंबी गर्दन वाली देवी
23. विकृतानना योगिनी – विकराल मुख वाली देवी
24. कोकिला योगिनी – कोयल जैसी मधुर वाणी
25. नारायणी योगिनी – विष्णु की शक्ति
26. मेघेश्वरी योगिनी – बादलों और वर्षा की देवी
27. भोगेश्वरी योगिनी – भोग और समृद्धि की देवी
28. संकटा योगिनी – संकटों को दूर करने वाली
29. कराली योगिनी – प्रलयंकारी देवी
30. चंडिका योगिनी – उग्र शक्ति की देवी
31. इंद्राणी योगिनी – इंद्र की शक्ति
32. शूलिनी योगिनी – त्रिशूल धारण करने वाली देवी
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३३-४८ (तृतीय समूह)
33. गौरी योगिनी – पवित्रता और कोमलता की देवी
34. भवानी योगिनी – मातृ शक्ति का स्वरूप
35. ब्रह्माणी योगिनी – सृजन शक्ति की देवी
36. रेवती योगिनी – काल चक्र की देवी
37. कौशिकी योगिनी – दिव्य योद्धा देवी
38. कात्यायनी योगिनी – शक्ति का उग्र रूप
39. रुद्राणी योगिनी – शिव की शक्ति
40. काली योगिनी – काल और परिवर्तन की देवी
41. भेरुंडा योगिनी – दो सिरों वाली पक्षी स्वरूप देवी
42. शत्रु मर्दिनी योगिनी – शत्रुओं का नाश करने वाली
43. प्रचंडा योगिनी – अत्यंत उग्र रूप
44. शंखिनी योगिनी – शंख से संबंधित देवी
45. शतघ्नी योगिनी – अनेक शस्त्रों से युक्त देवी
46. उग्रचंडी योगिनी – भयंकर योद्धा देवी
47. कपिला योगिनी – स्वर्ण आभा वाली देवी
48. कामेश्वरी योगिनी – प्रेम और आकर्षण की देवी
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४९-६४ (चतुर्थ समूह)
49. शीतला योगिनी – रोग और स्वास्थ्य की देवी
50. मनोहरमा योगिनी – सुंदरता और आकर्षण की देवी
51. अन्नपूर्णा योगिनी – अन्न और पोषण की देवी
52. त्रिपुरा योगिनी – तीन लोकों की शासक देवी
53. ज्येष्ठा योगिनी – दुर्भाग्य और संघर्ष की देवी
54. लक्ष्मी योगिनी – समृद्धि और धन की देवी
55. सरस्वती योगिनी – ज्ञान और संगीत की देवी
56. डंडा योगिनी – न्याय और दंड की देवी
57. पिंगला योगिनी – सूर्य ऊर्जा की देवी
58. विशालाक्षी योगिनी – व्यापक दृष्टि वाली देवी
59. शर्वाणी योगिनी – सर्वोच्च मातृशक्ति
60. त्रिशूला योगिनी – त्रिशूल धारण करने वाली देवी
61. भूतेश्वरी योगिनी – भूत-प्रेतों की स्वामिनी
62. नित्यक्लिन्ना योगिनी – प्रेम और भक्ति की देवी
63. वज्रेश्वरी योगिनी – अटूट शक्ति की देवी
64. ध्यान योगिनी – ध्यान और आत्मसाक्षात्कार की देवी
#64 योगिनियों की पूजा और महत्व
- तांत्रिक साधना – योगिनियों की पूजा तांत्रिक अनुष्ठानों में की जाती है ..
- शक्ति साधना – हर योगिनी देवी शक्ति का एक रूप मानी जाती हैं ..
- रक्षा और उपचार – कुछ योगिनियां रोग, विपत्तियों और शत्रुओं से बचाने वाली होती हैं ... ।
14/11/2025
🌼🌿।। कुलदेवी स्तोत्र ।।🌿🌼
नमस्ते श्री शिवाय कुलाराध्या कुलेश्वरी।
कुलसंरक्षणी माता कौलिक ज्ञान प्रकाशीनी।।1।।
वन्दे श्री कुल पूज्या त्वाम् कुलाम्बा कुलरक्षिणी।
वेदमाता जगन्माता लोक माता हितैषिणी।।2।।
आदि शक्ति समुद्भूता त्वया ही कुल स्वामिनी।
विश्ववंद्यां महाघोरां त्राहिमाम् शरणागत:।।3।।
त्रैलोक्य ह्रदयं शोभे देवी त्वं परमेश्वरी।
भक्तानुग्रह कारिणी कुलदेवी नमोस्तुते।।4।।
महादेव प्रियंकरी बालानां हितकारिणी।
कुलवृद्धि करी माता त्राहिमाम् शरणागतम्।।5।।
चिदग्निमण्डल संभुता राज्य वैभव कारिणी।
प्रकटीतां सुरेशानी वन्दे त्वां "कुल गौरवाम्"।।6।।
त्वदीये कुले जात: त्वामेव शरणम गत:!
त्वत वत्सलोहं आद्ये त्वं रक्ष रक्षाधुना।।7।।
पुत्रं देहि धनं देहि साम्राज्यं प्रदेहि मे|
सर्वदास्माकं कुले भूयात मंगलानु शाशनम ।।8।।
कुलाष्टकमिदं पुण्यं नित्यं य: सुकृति पठेत।
तस्य वृद्धि कुले जात: प्रसन्ना कुलेश्वरी।।9।।
कुलदेवी स्त्रोत्मिदम, सूपुण्यं ललितं तथा |
अर्पयामी भवत भक्त्या, त्राहिमां शिव गेहिनी ||10।।
।। श्री कुलदेव्यार्पणमस्तु ।।
❗जय महादेव❗
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