Desert Bishnoi
Bishnoi DESERT
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बिश्नोई समाज के होनहार युवाओ और समाज की अच्छी बाते हमें बताए हम जरूर आगे लायेगे 🙏❤️🙌👑
03/06/2026
अनिता विश्नोई हॉस्पिटल में मौ*त और जीवन के बीच संघर्ष कर रही है भगवान से प्रार्थना जल्दी स्वस्थ करे । अनिता आपको ये कदम नहीं उठाना चाहिए था , सोशल मीडिया पर हुई ट्रोल
03/06/2026
दुःखद
सादर नमन अशोक भाई मुक़ाम, नोखा
हार्ड अटैक
03/06/2026
हरियाणा की राजनीति के कोहिनूर, गरीब-मज़दूर पिछड़ों की बुलंद आवाज़, मृदुभाषी-मिलनसार युगपुरुष जननायक पूर्व मुख्यमंत्री स्व: चौधरी भजनलाल जी की 15 वी पुण्यतिथि पर सत् सत् नमन व प्रणाम।
02/06/2026
श्री गुरु जंबेश्वर मंदिर गांव मोहमदपुर रोही जिला फतेहाबाद।
इन डॉलर के चक्करों में समाज को क्यों
बदनाम कर रहे हो
बेशर्मों
विलेश्वर धाम के महंत गोपाल दास जी के आत्महत्या करने का मूल राज क्या है कोई बता सकता है
सहीराम जी विश्नोई को मरणोपरांत बिशनोई रत्न से सम्मानित किया गया तो हिसार जिले के सभी बिश्नोई मन्दिर अध्यक्षों को दिल्ली बुलाया कि सक्ताखेडा में भीड़ ना हो
धिक्कार है ऐसे आदमी पर अब तो इस आदमी की सोच से नफ़रत हो गई है श्री गुरु जम्भेश्वर भगवान दिवंगत आत्मा को अपने श्री चरणों में स्थान दें
31/05/2026
यह अनमोल हीरा खो मत देना भाइयों,
यह विकास पुरुष है जिन्होंने निःस्वार्थ भाव से बिश्नोई समाज की सेवा में और विकास में कोई कमी नहीं रखी! आगे महासभा चुनाव आ रहें हैं! इसलिए इस अनमोल रत्न को खो मत देना!
ि ॐ विष्णु
🙏🌳🦌
चौधरी सहीराम जी को श्रद्धांजलि और कुलदीप बिश्नोई के लिए आत्ममंथन का विषय :-
22 मई 2026 को बिश्नोई समाज ने अपना एक ऐसा महान व्यक्तित्व खो दिया, जिसकी भरपाई शायद कभी संभव नहीं होगी। परम श्रद्धेय चौधरी सहीराम जी बिश्नोई (एडवोकेट) का जीवन त्याग, सादगी, ईमानदारी, संघर्ष और समाजसेवा का जीवंत उदाहरण था।
विभाजन की विभीषिका झेलकर बहावलपुर से भारत आए इस महान व्यक्ति ने केवल अपना परिवार ही नहीं, बल्कि सैकड़ों परिवारों को सुरक्षित भारत पहुंचाने का कार्य किया। विधायक बने, हिंदी आंदोलन में जेल गए, अखिल भारतीय बिश्नोई महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे, मुकाम के मुख्य मंदिर और समाजहित के अनेक कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन जीवनभर कभी प्रचार और व्यक्तिपूजा के पीछे नहीं भागे।
104 वर्ष की आयु में भी उनकी सादगी, कर्मठता और स्पष्टवादिता लोगों को प्रेरित करती रही। यही कारण है कि उनके निधन पर पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई। मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने उसी दिन श्रद्धांजलि संदेश जारी किया और 29 मई को स्वयं उनके निवास पर पहुंचकर श्रद्धासुमन अर्पित किए। अनेक सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक हस्तियों ने उन्हें याद किया।
लेकिन आश्चर्य की बात है कि हरियाणा में स्वयं को "बिश्नोई समाज का सबसे बड़ा नेता", "विश्नोई रत्न" और समाज का संरक्षक मानने वाले कुलदीप बिश्नोई जी की ओर से न कोई सार्वजनिक श्रद्धांजलि आई, न सोशल मीडिया पर एक शब्द लिखा गया, न अंतिम दर्शन हुए और न ही शोकसभा में उपस्थिति दर्ज हुई।
प्रश्न यह है कि आखिर क्यों?
क्या चौधरी सहीराम जी किसी गुट के नेता थे? नहीं।
क्या उन्होंने कभी कुलदीप बिश्नोई का विरोध किया? नहीं।
क्या वे समाज के सम्मानित और सर्वमान्य बुजुर्ग नहीं थे? बिल्कुल थे।
फिर ऐसा कौन-सा कारण था कि समाज के इस महान सपूत के प्रति न्यूनतम संवेदना भी व्यक्त नहीं की गई?
दुर्भाग्य से यह पहला अवसर भी नहीं है।
गत वर्ष जब समाज के पूज्य संत महंत राजेंद्रानंद जी महाराज ब्रह्मलीन हुए थे, तब पूरा समाज शोकाकुल था। हजारों लोग अंतिम दर्शन और संस्कार में पहुंचे। लेकिन उसी दिन हिसार में रोडवेज बसों को झंडी दिखाने के कार्यक्रम में व्यस्त कुलदीप बिश्नोई, रेणुका बिश्नोई और भव्य बिश्नोई में से कोई भी अंतिम दर्शन के लिए नहीं पहुंचा।
समाज ने उस समय भी प्रश्न उठाए थे और आज भी वही प्रश्न खड़े हैं।
कहा गया है—
"विपरीत बुद्धि विनाश काले।"
जब व्यक्ति को सही सलाह देने वाले लोग समाप्त हो जाते हैं और उसके आसपास केवल खुशामदी लोगों का घेरा रह जाता है, तब निर्णय क्षमता प्रभावित होने लगती है।
गत दिनों जब चौधरी भजनलाल जी पर रेखा शर्मा ने टिप्पणी की थी, तब पहले सोशल मीडिया पर शेरो-शायरी और भावनात्मक पोस्टों का दौर चला। फिर कई दिन बाद प्रतिक्रिया आई। और जब रेखा शर्मा ने माफी मांगी, तो बिना समाज की भावना जाने उसी दिन उन्हें माफ भी कर दिया गया।
अब भाजपा की नियमित संगठनात्मक प्रक्रिया के तहत प्रदेश अध्यक्ष बदलने की घोषणा हुई है, लेकिन कुछ समर्थक और सलाहकार सोशल मीडिया पर ऐसा माहौल बनाने में लगे हैं मानो किसी व्यक्ति विशेष से टकराने के कारण यह निर्णय हुआ हो।
यह भारतीय जनता पार्टी है, जहां संगठन व्यक्ति से बड़ा माना जाता है। यहां प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री श्री अमित शाह तक संगठनात्मक अनुशासन का पालन करते हैं। प्रदेश अध्यक्षों का बदलना पार्टी की सामान्य प्रक्रिया है, कोई व्यक्तिगत विजय या पराजय नहीं।
कुलदीप जी को यह समझना होगा कि 10-15 सलाहकार और 20-30 सोशल मीडिया समर्थक वास्तविक जनसमर्थन का विकल्प नहीं हो सकते।
एक समय था जब कुलदीप बिश्नोई हरियाणा राजनीति के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते थे। आज यदि राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव लगातार घट रहा है, तो इसके लिए विरोधियों से अधिक आत्ममंथन की आवश्यकता है।
जब भी कुलदीप जी अपने क्षेत्र में आते हैं तो तीन वाक्य अवश्य सुनाई देते हैं— "मेरे संघर्ष के साथी" "मेरा घर-परिवार" और मेरे पास समय अभाव है, जल्दी है दिल्ली निकलना है...
लेकिन केवल इन शब्दों से समाज का विश्वास नहीं जीता जा सकता।
समाज देखता है कि उसके सुख-दुख में कौन खड़ा है।
समाज देखता है कि उसके संतों, महापुरुषों और बुजुर्गों के प्रति कौन सम्मान प्रकट करता है।
समाज देखता है कि नेता केवल चुनाव के समय आता है या हर परिस्थिति में साथ खड़ा रहता है।
चौधरी सहीराम जी ने कभी बड़े-बड़े दावे नहीं किए, लेकिन पूरा समाज आज उन्हें श्रद्धा से याद कर रहा है।
इसके विपरीत जो लोग स्वयं को समाज का सबसे बड़ा संरक्षक बताते हैं, वे समाज के सबसे बड़े दुःख के अवसरों पर भी अनुपस्थित दिखाई देते हैं।
यह आलोचना नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर है।
समय रहते यदि कार्यशैली, सलाहकारों और समाज के प्रति दृष्टिकोण में सुधार नहीं किया गया, तो इतिहास गवाह है कि जनता हीरो को जीरो और अर्श को फर्श बनाने में देर नहीं लगाती।
परम श्रद्धेय चौधरी सहीराम जी बिश्नोई को कोटि-कोटि नमन। आपकी सादगी, ईमानदारी, राष्ट्रभक्ति और समाजसेवा सदैव प्रेरणा देती रहेगी।
29/05/2026
✓ *बिश्नोई रत्न* स्व. सहीराम जी *धारणियां*
✓ की *स्मृति* में किए जाएंगे निम्नलिखित *सामाजिक कार्य* ...
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