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Dr.Ranjana Verma. Naturopath Yogacharya Dietician हर मर्ज की दवा – कलौंजी
कलयुग में धरती की संजीवनी - कलौंजी
कहते हैं पुराने ज़माने में हकीम और वैद्य इसे अपने इलाज का सबसे मजबूत हथियार मानते थे।
आज भी गांव की दादियां और नानियां कहती हैं –
अगर घर में कलौंजी है, तो अस्पताल का रास्ता भूल जाओ"
छोटी-सी काली बीजियां, लेकिन ताकत इतनी कि आपकी पूरी सेहत का पहरेदार बन जाएं।
कलौंजी का इतिहास,,,,
कलौंजी का जिक्र आयुर्वेद, यूनानी और इस्लामी तिब्ब — तीनों में मिलता है।
मिस्र की रानी क्लियोपेट्रा अपनी त्वचा और बालों के लिए कलौंजी तेल का इस्तेमाल करती थी।
यहां तक कि फिरऔनों के मकबरों में भी कलौंजी के बीज मिले हैं — यानी इसकी पहचान हज़ारों साल पुरानी है।
कलौंजी का स्वाद और प्रकृति
स्वाद में हल्का कड़वा और मिर्ची जैसा तीखापन
प्रकृति में गर्म — यानी शरीर को अंदर से ताकत और रोगों से लड़ने की क्षमता देता है
सेवन के तरीके
कलौंजी का इस्तेमाल आप रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कई तरह से कर सकते हैं —
1️⃣ सुबह शहद के साथ – 1 छोटा चम्मच कलौंजी पाउडर + 1 चम्मच शहद, खाली पेट लें
2️⃣ चाय में डालकर – सर्दी-जुकाम में बहुत असरदार
3️⃣ रोटी में मिलाकर – आटे में 1-2 चम्मच कलौंजी मिलाएं, हेल्दी और स्वादिष्ट
4️⃣ दूध के साथ – ताकत और इम्यूनिटी के लिए
5️⃣ तेल बनाकर – बालों और जोड़ों के लिए वरदान
कलौंजी के चमत्कारी फायदे
(मौत को छोड़कर लगभग हर मर्ज में असर)
डायबिटीज कंट्रोल – ब्लड शुगर लेवल को संतुलित करता है
BP नॉर्मल – हाई और लो ब्लड प्रेशर दोनों में मददगार
बाल झड़ना बंद – गंजापन तक में असर
त्वचा को निखारे – पिंपल, दाग-धब्बे खत्म
लकवा में राहत – पुराने नुस्खों में शामिल
कान दर्द – 2 बूंद कलौंजी तेल से तुरंत आराम
सर्दी-जुकाम और अस्थमा – सांस की नली साफ
गठिया और जोड़ों का दर्द – सूजन और दर्द दोनों कम
आंखों की रोशनी बढ़ाए – मोतियाबिंद में भी लाभदायक
तनाव और चिंता कम – दिमाग को शांति
नींद मीठी और गहरी – अनिद्रा में फायदा
गैस और अपच खत्म – पाचन तंत्र को मजबूत
याददाश्त तेज – बच्चों से बुजुर्गों तक असरदार
सावधानियां.....
गर्भवती महिलाएं इसका सेवन न करें
अधिक मात्रा में खाने से शरीर में गर्मी बढ़ सकती है
एलर्जी वाले लोग पहले थोड़ा इस्तेमाल करके देखें
निष्कर्ष
कलौंजी कोई आम बीज नहीं, ये आपके शरीर का प्राकृतिक बॉडीगार्ड है।
अगर इसे रोज़ाना सही तरीके से अपनाया जाए, तो आप कई बीमारियों से बच सकते हैं।
हेल्थ मंत्र:
छोटे-से बीज में छुपा है सेहत का खजाना,
कलौंजी अपनाओ, बीमारियों को दूर भगाओ... Dr.Ranjana Verma. Naturopath Yogacharya Dietician
05/08/2026
ध्यान से क्या-क्या प्राप्तियां होती हैं
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🔸️ध्यान सिर्फ आंख बंद करके बैठना नहीं है। ये अपने आप को अंदर से ठीक करने की सबसे बड़ी दवा है।
1) शारीरिक प्राप्तियां
इम्यून सिस्टम मजबूत: रिसर्च कहती हैं रोज 20 मिनट ध्यान करने से बीमारियां कम होती हैं।
नींद बेहतर: दिमाग शांत होता है तो अनिद्रा दूर होती है।
BP और हार्ट रेट कंट्रोल: तनाव कम होने से हार्ट हेल्दी रहता है।
दर्द कम: सिरदर्द, पीठदर्द, बॉडी पेन में राहत मिलती है।
2) मानसिक प्राप्तियां
तनाव और चिंता खत्म: ध्यान से कोर्टिसोल यानी स्ट्रेस हार्मोन कम होता है।
फोकस और याददाश्त बढ़े: दिमाग भटकना बंद होता है, काम में मन लगता है।
गुस्सा कंट्रोल: छोटी-छोटी बात पर रिएक्ट करना कम हो जाता है।
नेगेटिव सोच दूर: खुद से और दूसरों से प्यार बढ़ता है।
3) भावनात्मक और आध्यात्मिक प्राप्तियां
खुद को जानना: "मैं कौन हूं" ये सवाल का जवाब अंदर से मिलता है।
शांति और संतुष्टि: बाहर कुछ ना भी हो तब भी मन शांत रहता है।
करुणा और प्रेम: रिश्तों में झगड़े कम, समझदारी बढ़ती है।
भगवान से कनेक्शन: जैसे आप मंदिर में
ध्यान करतै हैं, वैसे ही भीतर भगवान महसूस होते हैं
4) प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ में
बेहतर निर्णय: आप घबराहट में नहीं, शांति से फैसला लेते हैंl
क्रिएटिविटी बढ़े: नए आइडिया आते हैं,
रिश्ते सुधरें: सुनने की शक्ति बढ़ती है।
5) ध्यान कैसे शुरू करें? 3 स्टेप
जगह: शांत कोना, मंदिर जैसा माहौल। सुबह 10 मिनट काफी है
पोज: सीधे बैठो, आंख बंद, सांस पर ध्यान
नियम: रोज करो। 21 दिन में आदत बन जाएगी
सबसे बड़ी प्राप्ति: ध्यान से आपको "खुद" मिल जाते हैं। बाकी सब चीजें अपने आप मिलती जाती हैं। यदि आप रोज ध्यान करते हैं, तो आपने ये बदलाव खुद महसूस किए होंगे। सबसे बड़ा बदलाव आपको क्या लगा?
🙏आप का दिन शुभ हो🙏
11/07/2026
भारतीय योग संस्थान पिछले 59 वर्षों से निस्वार्थ भाव से पूरे भारत में ही नहीं अब विश्व के कई देशों में निशुल्क ( फ्री) योग साधना के माध्यम से लाखों लोग प्रतिदिन सुबह योग करने आते है। शारीरिक और मानसिक लाभ लेकर अपने गृहस्थ जीवन , व्यवसाय, नौकरी करते अपने जीवन को सरल बना आनंदित और सुखमय जीवन बीता रहे है।
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Bharatiya Yog Sansthan
Address: Near Mangalam Place, Sector 3, Rohini, Delhi – 110085, India 📌 �
09/06/2026
मेरी इस रंगविहीन दाल को देखकर आप लोग आश्चर्यचकित न हो। मेरा तो दाल बनाने का तरीका यही है।
मैं दाल बनाने से पहले उसे कम से कम 30 से 35 मिनट और ज्यादा से ज्यादा 1 घंटे के लिए भिगो देती हूँ। उसके बाद उसे हाथों से अच्छे से रगड़-रगड़ कर धोती हूँ और फिर बनाती हूँ।
अब पुराना तरीका तो मेरे पास रहा नहीं कि मैं बटलोई या खुले भगोने में दाल बनाऊँ और उसका झाग निकालती जाऊँ। समय की कमी और आज की जीवनशैली में हम सभी प्रेशर कुकर का ही इस्तेमाल करते हैं। इसलिए मैं दाल को भिगोकर ही बनाती हूँ, यह तरीका सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है।
फोटो में आप देख सकते हैं कि अच्छी तरह भीगने के बाद दाल का रंग थोड़ा हल्का हो गया है। इसके पीछे एक गहरा वैज्ञानिक कारण है। जब हम दाल को 40 मिनट या एक घंटे के लिए भिगोते हैं, तो इसके कई फायदे होते हैं-
१. दालों की ऊपरी परत पर जो सैपोनिन (झाग बनाने वाला तत्व) और प्यूरिन होते हैं, वे पानी में घुल जाते हैं। जब हम दाल को रगड़कर धोते हैं, तो ये नुकसानदेह तत्व काफी हद तक साफ हो जाते हैं।
२. दाल को भिगोने से उसके अंदर मौजूद 'एंटी-पोषक तत्व' जैसे फाइटिक एसिड और लेक्टिन्स कम हो जाते हैं। इससे दाल खाने के बाद पेट में भारीपन, गैस या यूरिक एसिड बढ़ने जैसी समस्या नहीं होती।
३. भीगी हुई दाल को पकाने से हमारा शरीर उसके अंदर मौजूद आयरन, जिंक और प्रोटीन को ज्यादा बेहतर तरीके से सोख पाता है।
४. भीगी हुई दाल कुकर में बहुत जल्दी और अच्छी तरह गल जाती है, जिससे गैस की भी बचत होती है। (इस समय lpg बचाना तो वैसे भी बहुत जरुरी है।)
यदि हम पुराने समय की तरह घंटों खुले बर्तन में दाल नहीं पका सकते, तो पकाने से आधा-एक घंटा पहले उसे भिगो देना सबसे बढ़िया विकल्प है।
अगर आपके पास समय है, तो थोड़ी देर पकने के बाद आये झाग को निकाल दीजिये फिर कुकर बंद कीजिये।
हृदय ♥️क्या है?
हृदय एक मांसपेशीय, खोखला और संकुचनशील अंग है, जो पूरे शरीर में रक्त पहुँचाने का काम करता है। यह जीवन भर बिना रुके कार्य करता रहता है। हृदय द्वारा भेजा गया शुद्ध रक्त शरीर के सभी अंगों को ऑक्सीजन और पोषण प्रदान करता है।
हृदय रोग कैसे होता है?
जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, रक्त वाहिनियों (धमनियों) की भीतरी दीवारों पर वसा, कोलेस्ट्रॉल और कैल्शियम जमा होने लगते हैं। इससे धमनियाँ संकरी और कठोर हो जाती हैं, जिससे रक्त का प्रवाह कम हो जाता है और हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
हृदय रोग के प्रमुख प्रकार
* कोरोनरी आर्टरी डिजीज (हृदय की धमनियों का संकरा होना)
* हार्ट अटैक
* ब्रेन स्ट्रोक
* हृदय वाल्व संबंधी रोग
* हृदय की धड़कन में अनियमितता
* हृदय की मांसपेशियों की कमजोरी
हृदय रोग के मुख्य कारण
1. बढ़ती उम्र – उम्र के साथ धमनियाँ कठोर होती जाती हैं।
2. लिंग – सामान्यतः पुरुषों में जोखिम अधिक माना जाता है।
3. वंशानुगत कारण – परिवार में हृदय रोग का इतिहास होने पर खतरा बढ़ जाता है।
4. अधिक वसायुक्त भोजन – तैलीय और वसा युक्त भोजन धमनियों में रुकावट बढ़ाता है।
5. मधुमेह (डायबिटीज़) – रक्त वाहिनियों को नुकसान पहुँचा सकता है।
6. धूम्रपान और शराब – धमनियों को क्षति पहुँचाते हैं।
7. उच्च रक्तचाप – हृदय पर अतिरिक्त दबाव डालता है।
8. मोटापा – हृदय रोग की संभावना बढ़ाता है।
9. तनाव और चिंता – लंबे समय तक तनाव हृदय के लिए हानिकारक हो सकता है।
10. निष्क्रिय जीवनशैली – शारीरिक गतिविधि की कमी से जोखिम बढ़ता है।
बचाव के उपाय
* नियमित योग और व्यायाम करें।
* संतुलित एवं कम वसा वाला भोजन लें।
* धूम्रपान और शराब से बचें।
* वजन नियंत्रित रखें।
* रक्तचाप और शुगर की नियमित जाँच कराएँ।
* तनाव कम करने के लिए ध्यान (मेडिटेशन) और प्राणायाम करें।
हृदय रोगियों के लिए लाभकारी योगासन
* ताड़ासन
* हस्तोत्थानासन
* उतानमंडूकासन
* गोमुखासन
* स्कंध संचालनासन
* अर्ध-उष्ट्रासन
* अर्धचक्रासन
* भुजंगासन
* मकरासन
* शवासन
प्राणायाम
* अनुलोम-विलोम
* उज्जायी प्राणायाम
* भ्रामरी प्राणायाम
* गहरी एवं लंबी श्वास
ध्यान और योग निद्रा
* प्रतिदिन 15–15 मिनट ध्यान करने की सलाह।
* तनाव कम करने और मानसिक शांति के लिए योग निद्रा लाभकारी बताई गई है।
भोजन संबंधी सुझाव
* हल्का, सुपाच्य और सात्विक भोजन।
* सलाद, अंकुरित अनाज, फल, दलिया, खिचड़ी और मल्टीग्रेन आटे की रोटी।
* तले हुए, गरिष्ठ और अधिक मसालेदार भोजन से बचें।
अन्य सुझाव
* धूम्रपान और शराब का सेवन न करें।
* प्रतिदिन सैर करें।
* तनाव कम रखें।
* जीवनशैली की गलतियों को सुधारें।
* क्षमता के अनुसार कार्य करें।
* प्रसन्नचित्त रहें।
इस लेख का मुख्य संदेश है कि स्वस्थ जीवनशैली, संतुलित आहार और नियमित योगाभ्यास द्वारा हृदय रोग के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।🙏🙏
Please join Free yoga classes organised by Bharatiya yog Sansthan all over India.
23/05/2026
Garmiyon ke dino m sharir ko thandak dene vale food hi diet m shamil kre
16/05/2026
भारतीय योग संस्थान हरिद्वार के पूर्वी जिले द्वारा पांच दिवसीय मोटापा रोग निवारण शिविर का सफलतापूर्वक समापन डिवाइन लाइट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में हुआ।
शिविर के पांचवे दिन की साधना जिला अधिकारियों व प्रांतीय अधिकारियों द्वारा कराई गई जिसमें जयप्रकाश जी ने सूक्ष्म क्रियाएं गहरे लंबे श्वास, सूर्य नमस्कार, कमर चक्रासन, ऊष्ट आसान, शशकासन भाग 2 बहुत ही सुंदर कराया , हरीश तनेजा जी ने सिंह गर्जनासन, लुडकना सर्पासन और हंसी की चारों क्रियाएं कराई , प्रवीण अरोड़ा जी ने शवासन का अभ्यास कराया, तन्नु त्यागी जी ने प्राणायाम का अभ्यास कराया , सहज ध्यान सुशीला गिल्डियाल जी ने कराया , मोटापे को कम करने में निष्काम कर्म की भूमिका सुखदेव राज सिडाना जी ने बहुत सुंदर ढंग से समझाया, प्रार्थना शांति पाठ रेखा त्यागी जी द्वारा कराया गया और मंच संचालन पूर्वी जिले की जिला प्रधान श्रीमती सुधा जैन जी ने बहुत ही सुंदर ढंग से किया कोमल सुमरा जी ने बहुत सुंदर फोटोग्राफी की।
सभी जिले से आए अधिकारियों का बहुत-बहुत धन्यवाद सभी साधिकाओं का शिविर को सफल बनाने में बहुत सहयोग रहा उनका दिल से धन्यवाद।
फीडबैक फॉर्म के द्वारा नई साधिकाओं से बहुत सुंदर सुझाव दिए गए। पूरी पूर्वी जिला टीम की ओर से सभी का तहे दिल से धन्यवाद।
निवेदक - सुधा जैन
(पूर्वी जिला प्रधान )
15/05/2026
🙏🏻
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