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04/08/2026
चार साल का हिसाब देने से बच रहे मुख्यमंत्री - विपिन सिंह परमार
रोज़ नया शिगूफ़ा छोड़कर जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं
पालमपुर - प्रदेश भाजपा उपाध्यक्ष एवं सुलाह विस के विधायक विपिन सिंह परमार ने कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार को मुख्यमंत्री केवल बयानों की बैसाखियों पर खड़ी करने का असफल प्रयास कर रहे हैं। जनता अब हिसाब मांग रही है तो मुख्यमंत्री बोखला गए हैं।
परमार ने कहा कि हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार के लगभग चार वर्ष पूरे होने को हैं, लेकिन मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू आज भी सरकार चलाने से अधिक बयानबाज़ी करने में व्यस्त दिखाई देते हैं। जिस सरकार को अपने कामकाज का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखना चाहिए था, वह रोज़ नए आरोपों, नए विवादों और नए राजनीतिक शोर के सहारे अपनी नाकामियों पर पर्दा डालने का असफल प्रयास कर रही है।
विपिन सिंह परमार ने कहा कि प्रदेश की जनता अब यह समझ चुकी है कि जब-जब कांग्रेस सरकार अपने वादों में विफल होती है, तब-तब मुख्यमंत्री कोई नया राजनीतिक मुद्दा उछाल देते हैं। कभी भाजपा नेताओं पर अनर्गल आरोप, कभी केंद्र सरकार पर दोषारोपण और कभी विपक्ष पर बेबुनियाद बयानबाज़ी। यह सिलसिला अब जनता की नज़र में पूरी तरह बेनकाब हो चुका है।
उन्होंने कहा कि यदि मुख्यमंत्री को वास्तव में किसी भी प्रकार की अनियमितता, भ्रष्टाचार या अवैध संपत्ति के प्रमाण दिखाई देते हैं, तो फिर चार वर्षों से कार्रवाई क्यों नहीं हुई? यदि तथ्य हैं तो कानून के अनुसार कार्रवाई करें, लेकिन केवल अखबारों की सुर्खियां बटोरने के लिए बयान देना मुख्यमंत्री पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है। प्रदेश की जनता अब केवल शब्द नहीं, परिणाम देखना चाहती है।
परमार ने कहा कि मुख्यमंत्री आज भाजपा के नेताओं पर प्रश्न उठा रहे हैं, जबकि सच्चाई यह है कि कांग्रेस की अपनी राजनीतिक ज़मीन लगातार खिसक रही है। हाल ही में विभिन्न राज्यों के उपचुनावों में जनता ने कांग्रेस के दावों की वास्तविकता भी सामने रख दी है। दूसरी ओर हिमाचल में कांग्रेस संगठन के भीतर लगातार बैठकों, रणनीतियों और असंतोष की खबरें यह बताने के लिए पर्याप्त हैं कि सरकार से लेकर संगठन तक सब कुछ सामान्य नहीं है। मुख्यमंत्री अपनी ही पार्टी में बढ़ती बेचैनी को छिपाने के लिए भाजपा पर हमले कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि चार वर्षों में कांग्रेस सरकार ने प्रदेश को क्या दिया? युवाओं को रोजगार नहीं मिला, किसानों और बागवानों की समस्याएं जस की तस हैं, कर्मचारी वर्ग आज भी अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहा है, विकास कार्य ठप पड़े हैं, सड़कों की हालत बदतर है, स्वास्थ्य सेवाएं चरमराई हुई हैं और निवेश के बड़े-बड़े दावे केवल फाइलों तक सीमित रह गए हैं। कांग्रेस सरकार का पूरा शासनकाल घोषणाओं, भाषणों और प्रेस कॉन्फ्रेंसों तक सिमट गया है। धरातल पर उपलब्धि शून्य है।
विपिन सिंह परमार ने कहा कि मुख्यमंत्री प्रतिदिन विपक्ष पर हमला बोलते हैं, लेकिन जनता पूछ रही है कि चुनावों से पहले किए गए लाखों नौकरियों के वादे कहां गए? महिलाओं से किए गए वादे कहां गए? आर्थिक व्यवस्था सुधारने के दावे कहां गए? प्रदेश को आत्मनिर्भर बनाने की योजनाएं कहां हैं? इन प्रश्नों का उत्तर देने की बजाय मुख्यमंत्री केवल राजनीतिक धुआं खड़ा कर रहे हैं ताकि जनता असली मुद्दों से भटक जाए।
उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि प्रदेश प्राकृतिक आपदाओं, आर्थिक चुनौतियों और विकास की आवश्यकता से जूझ रहा है, लेकिन सरकार का पूरा ध्यान राजनीतिक प्रतिशोध और प्रचार तक सीमित है। मुख्यमंत्री को समझ लेना चाहिए कि विरोधियों पर कीचड़ उछालने से अपनी विफलताओं का दाग नहीं छिपता। जनता सब देख रही है और हर दिन सरकार का वास्तविक चेहरा पहचान रही है।
परमार ने कहा कि लोकतंत्र में जनता सबसे बड़ी निर्णायक होती है। जनता को लंबे समय तक भ्रमित नहीं किया जा सकता। चुनावी मंचों से किए गए वादों और वास्तविक कामकाज के बीच का अंतर अब प्रदेश का बच्चा-बच्चा समझ चुका है। इसलिए मुख्यमंत्री जितनी ऊंची आवाज़ में भाषण देंगे, जनता उतनी ही मजबूती से उनसे जवाब मांगेगी।
उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी जनता के बीच मजबूती से खड़ी है और प्रदेश के हितों की आवाज़ उठाती रहेगी। कांग्रेस सरकार का अहंकार, उसकी विफल नीतियां और केवल बयानों पर आधारित राजनीति अब अपने अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। प्रदेश की जनता बदलाव का मन बना चुकी है। आने वाला समय हिमाचल में भाजपा का होगा और जनता कांग्रेस सरकार को उसकी नाकामियों, झूठे वादों तथा जनविरोधी नीतियों का लोकतांत्रिक जवाब अवश्य देगी। कांग्रेस को यह भ्रम छोड़ देना चाहिए कि केवल बयानबाज़ी से जनता का विश्वास जीता जा सकता है; विश्वास काम से बनता है, और यही वह कसौटी है जिस पर प्रदेश सरकार पूरी तरह असफल साबित हुई है।
04/08/2026
पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा है कि सरकार ने डा. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी और चौधरी सरवन कुमार हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय में फीस दोगुनी कर दी है। इस फीस बढ़ौतरी से छात्र व अभिभावक परेशान हैं तथा सरकार को अपना जनविरोधी निर्णय वापस लेना चाहिए। जयराम ठाकुर ने शिमला से जारी बयान में कहा कि आए दिन छात्रों के प्रतिनिधिमंडल फीस वृद्धि से होने वाली परेशानियों के बारे में मिलने के अलावा पत्र लिख रहे हैं।
हिमाचल BJP का कल शिमला में शक्ति प्रदर्शन: विधायक दल मीटिंग में फैसला, पार्टी MLA पर FIR पर भड़का विपक्ष; विधानसभा में घेरने की रणनीति
04/08/2026
20 साल बाद मिली कामयाबी, डलहौजी के जंगल में दो दशक बाद दिखा दुर्लभ हिमालयन सीरो
चंबा जिला के डलहौजी के जंगलों में करीब दो दशक बाद दुर्लभ हिमालयन सीरो की मौजूदगी दर्ज की गई है। कालाटोप-खज्जियार वन्यजीव अभयारण्य से सटे डलहौजी कैचमेंट क्षेत्र में इस दुर्लभ वन्यजीव को पहली बार कैमरे में रिकॉर्ड किया गया है। लिहाजा माना जा रहा है कि क्षेत्र का प्राकृतिक आवास अब भी इस दुर्लभ प्रजाति के लिए सुरक्षित और अनुकूल बना हुआ है। बहरहाल हिमालयी सीरो के कैमरे में कैद होने को वन विभाग एक बड़ी उपलब्धि मान रहा है। जानकारी के अनुसार वन विभाग ने वन्य जीव निगरानी के लिए कैमरे लगाए हुए हैं। इन कैमरों में हिमालयन सीरो की तस्वीरें और गतिविधियां रिकॉर्ड हुईं। पिछले लगभग 20 वर्षों से इस क्षेत्र में इस दुर्लभ जानवर की कोई प्रमाणिक मौजूदगी दर्ज नहीं हुई थी। ऐसे में इसका दोबारा दिखाई देना वन्यजीव संरक्षण की दिशा में बड़ी सफलता माना जा रहा है।
हिमालयन सीरो एक शर्मीला और कम दिखाई देने वाला जंगली खुरदार स्तनधारी है, जो आमतौर पर घने जंगलों, चट्टानी ढलानों और दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में रहता है। इसकी संख्या सीमित होने के कारण इसे दुर्लभ वन्यजीवों में गिना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रजाति की वापसी से क्षेत्र की जैव विविधता और वन पारिस्थितिकी तंत्र की बेहतर स्थिति का भी संकेत मिलता है। वन विभाग का कहना है कि इस दुर्लभ प्रजाति की मौजूदगी को देखते हुए डलहौजी कैचमेंट और आसपास के वन क्षेत्रों में निगरानी और संरक्षण गतिविधियों को और मजबूत किया जाएगा। साथ ही स्थानीय लोगों से भी अपील की गई है कि वन्य जीवों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखने में सहयोग करें, ताकि ऐसी दुर्लभ प्रजातियां भविष्य में भी सुरक्षित रह सकें। कैमरे में इसकी तस्वीर कैद होने से क्षेत्र की जैव विविधता और संरक्षण प्रयासों को भी नई मजबूती मिली है। हिमालयन सेरो भारत के हिमालयी राज्यों के अलावा नेपाल, भूटान और दक्षिण-पूर्व एशिया के कुछ हिस्सों में पाया जाता है। कालाटोप-खज्जियार वन्यजीव अभयारण्य पहले से ही काला भालू, तेंदुआ, घोरल, कस्तूरी मृग सहित कई महत्वपूर्ण वन्यजीवों का आवास माना जाता है। लिहाजा डलहौजी कैचमेंट एरिया में सेरो की ताजा रिकॉर्डिंग ने इसकी पारिस्थितिक महत्व को और बढ़ा दिया है। यह दुर्लभ रिकॉर्डिंग केवल वन्यजीव प्रेमियों के लिए ही नहीं, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी एक सकारात्मक संकेत है।
20 साल बाद वापसी
वन बल प्रमुख डा. संजय सूद का कहना है कि चंबा जिले के डलहौजी के जंगलों में दो दशक बाद इस वन्यजीव की वापसी हिमाचल प्रदेश की समृद्ध जैव विविधता और सफल संरक्षण प्रयासों का एक उत्साहजनक नतीजा है। डीएफओ डॉ. कुलदीप सिंह जमवाल ने कहा कि हिमालयन सेरो का पहला वीडियो रिकॉर्ड उपलब्ध हुआ है।
04/08/2026
उपमुख्यमंत्री,,लाहौल-स्पीति की विधायक एवं आदिवासी कांग्रेस की नव नियुक्त अध्यक्ष सुश्री अनुराधा राणा जी ने शिष्टाचार भेंट की।
अनुराधा जी को आदिवासी कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किए जाने पर हार्दिक बधाई एवं उज्जवल कार्यकाल के लिए शुभकामनाएँ।
04/08/2026
भाजपा विधायक दल
मुख्यमंत्री आजकल भविष्यवक्ता बन रहे हैं विडंबना यह है कि कोई भी उनकी बात को गंभीरता से नहीं लेता।
Political settlement की दिल्ली तक रिपोर्ट के बाद जब सुधीर शर्मा पर FIR हुई तो नेताओं की चुप्पी से परेशान दिल्ली दरबार को खुद आगे आकर आदेश देना पड़ा,,अब विधायक दल की बैठक में आज क्या होगा, पोलिटिकल प्रेशर सीएम का साफ़ दिखाई दे रहा है, सुधीर, आशीष, राकेश जामवाल जैसे कुछ चेहरों को छोड़कर बाकी सभी statements लोगों को पसंद नहीं आ रही और ना भाजपा की राजनीति जनता के हल्क से उतर रही है. ऐसे में आज सीएम को घेरने की राजनीति कितनी मजबूत होगी इस पर निगाहें है हमारी.
04/08/2026
हिमाचल बिलासपुर: बस में 58 ग्राम चिट्टा के साथ पंजाब की एक युवती को किया गिरफ्तार...
आरोपी की पहचान स्नेहलता (22) पुत्री मुकेश कुमार, निवासी कोटखालसा, अमृतसर (पंजाब) के रूप में हुई है। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से लगभग 58 ग्राम चिट्टा (हेरोइन) बरामद किया गया...
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इंदिरा गांधी सिखाती हुईं कि जब सड़क पर हिंसा से सरकार बदलने का प्रयास हो तो क्या करना चाहिए
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