Work from home only female
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07/06/2026
पटना शहर की रहने वाली अंजु पढ़ी लिखी होने के साथ-साथ, समझदार और सपनों से भरी लड़की थी l वह पढ़ने में तेज होने के साथ ग्रेजुएशन भी किया लेकिन नौकरी का मौका होने के बावजूद वह नौकरी नहीं कर पाई थी l क्योंकि उसके मम्मी पापा का कहना था कि "लड़की अगर ज्यादा पढ़ लिख ले तो घमंडी हो जाती है" और लड़का ढूंढने में भी परेशानी होती है शादी के बाद अपने ससुराल जाकर नौकरी कर लेना अगर यहां नौकरी करोगी तो पता नहीं शादी के बाद ससुराल वाले को पसंद आए या ना आए इसीलिये अब इसकी शादी कर दो l अंजू का सपना मानो टूट गया l "कितना ख्वाब सजाए रखी थी वह अपने दिल में" पर कर भी क्या सकती थी लड़की जात जो ठहरी l बनगांव का रहने वाला एक लड़का था राजू l ना ज्यादा पढ़ा लिखा, ना रंग रूप, ना पक्की नौकरी, जब अंजू को देखे राजू के माता पिता आये पढ़ी लिखी,सुंदर, सुशील साहमि सी लड़की को एक नजर में ही पसंद कर लिया गया l राजू के पिता ने कहा "हम दहेज ना लेंगे हमारे पास धन की कोई कमी नहीं है" खेत, जमीन और भी बहुत कुछ है अगर कुछ पैसे की जरुरत हो तो हम आपको देंगे ताकि आप अपनी बेटी की शादी में कोई कमी न रखे बारातियो के स्वागत में भी कोई कमी ना रहेl अंजू के माता-पिता ने पैसे और दिखावे को देखकर उसकी शादी पक्की कर दी राजू से l अंजू के लाख समझने पर भी उसके माता-पिता नहीं माने l वह बार-बार कहती रही की लड़का अच्छा नहीं है स्वभाव से लेकर देख-रेख तक पर उसके माता-पिता उसकी एक ना सुनी और शादी कर दी l शादी के बाद जब अंजू ससुराल पहुंची कुछ ही दिन बाद पता चला लड़का गुस्सेल और शराबी भी है तो उसकी जिंदगी जैसे अँधेरे में चली गई l उसके सपने और आत्मसम्मान सब उसके शादी के बाद पीछे छूट गई l उसकी पढ़ाई जैसे उसकी गलती बन गई l पति रोज शराब पिकर आता, छोटी-छोटी बातो पर चिल्लाता l गांव में सबके सामने उसे अपमान करता l पढ़ी-लिखि होने पर ताने देता "ज्यादा पढाई ने दिमाग खराब कर दिया है तुम्हारा"l अंजू रोज रात को रोती पर किसी से कुछ नहीं कहती थी l सास भी उसे देखकर सोचती "शहर की लड़की है टीकेगी नहीं"l वह रोज अपमानित होती अपने ससुराल वालों से, पर सब चुप -चाप सहती रहती l एक दिन अंजू मायके गई और बहुत हिम्मत जुटाकर अपने माता पिता से बोली मेरी जिंदगी टूट रही है मैं क्या करूं और सारी बातें बता दी अपने ससुराल की l यह सब सुन उसके माँ ने कहा "अब शादी हो गई है सहकर रहना ही पड़ेगा अगर नहीं सह कर रहोगी तो लोग क्या कहेंगे" l यह सब सुन अंजू मानो कुछ दिनों तक सदमे में रही l वह कुछ सोच नहीं पा रही थी l ससुराल में पति का साथ ना मिला और ना मायके में माता-पिता का l उसे घुटन सी होने लगी थी अपनी जिंदगी से, क्या करें क्या ना करें सोचती रहती थी l एक दिन ऐसा आया कि अंजू समझ गई कि अब लडाई उसकी खुद की है वह हार नहीं मानेगी l वह रोना छोड़ दिया और अपने ससुराल वापस आ गई l पति तो ना बदला लेकिन अंजू अपने आप को बदलने में लग गई पढ़ी लिखी होने के कारण वह गांव की औरतों को पढ़ना शुरू कर दी और साथ ही बच्चों को भी ट्यूशन देने लगी इस तरह उसने ना अपना घर छोड़ा और ना ही खुद को l एक दिन की बात है अंजू का पति नशे में धुत कहीं से आ रहा था की अचानक नाली में गिर पड़ा l यह देख गांव के लोग उस पे थू थू करने लगे l बच्चे मजाक उड़ाते और हंसते, लेकिन राजू को कोई फर्क नहीं पड़ने वाला था क्योंकि वह नशे में जो था l अंजू को एक महिला ने बताया,वह दौड़ी गयी और अपने पति को बड़े आदर और सम्मान के साथ घर ले आई l नहलाया धुलया साफ कपड़े पहना कर बिस्तर पर लेटाया l एक भी गाली ना देकर पानी और खाना उसके पास रख चली गयी l लेकिन राजू को अपमानित नहीं किया की l यह सब देख उसकी सास सोचने लगी, मैं तो इसे घमंडी समझती थीl यह पढ़ी लिखी लड़की मेरे बेटे को छोड़ कर एक दिन चली जाएगी यह सोच रही थी इसलिए मैं जानबुझ कर कड़वी बोलती थी l हर बात में टोका- टोकी करती ताकी वह डरी सहमी रहे और मैं उसकी छुपी को कामजोरी समझती थी, पर ये लड़की तो मजबूत निकली घमंडी नहीं l धीरे-धीरे गांव में लोग अंजू का काम और व्यवहार देख उसे मास्टरायिन कहने लगे और सम्मान देने लगे l "कुछ औरतें काना-फुसी करती ऐसी बहू किस्मत वालों को मिलती है" l एक समय ऐसा आया कि गांव के बुजुर्ग राजू की पत्नी की तारीफ कर रहे थे कि अचानक राजू वहां आया , उसकी बातें सुन सोच में पड़ गया मेरी पत्नी की इज्जत यहां सब कोई कर रहा है और एक मैं हूं जो पढ़ नहीं पाया, कुछ बन नहीं पाया l और जब अंजू शादी करके मेरे घर आई तो मैं उससे जलने लगा था अपनी नाकामी पर l इसलिए गुस्सा करता, ,शराब पिता था l "बड़ी शर्म की बात है मैं हर दिन शराब में डूबा रहता हूं और मेरी पत्नी का यहां हर कोई इज्जत करता है"l और मैं..........जिस औरत को मैं दबा रहा था वह मुझे उठा रही थी मैं क्यों नहीं समझ पाया मुझे अब शर्म आ रही है अंजू से.......यह सोचते सोचते वह घर पहुंच गया l घर पहुंच कर सबसे पहले अंजू से माफी मंगा और बोला आज से मैं ऐसा कोई काम नहीं करूंगा जिससे इस परिवार की इज्जत जाए l मैं तुम्हारा सहारा बनना चाहता हूं और मदद करना चाहता हूं अंजू ने राजू को हिसाब-किताब सिखाया l सासु माँ घर के कामो में अंजू की मदद करने लगी l तीनो ने मिलकर एक छोटा बिजनेस शुरू किया l कुछ ही सालो में अंजू का जीवन पूरी तरह बदल गई l जिस पति ने कभी "तू कुछ नहीं है" कहा था वही आज गांव वालों के सामने बोलता है आज मैं जो कुछ भी हूं अपनी पत्नी की वजह से हूं l मेरी पत्नी मेरी पहचान है, सासु माँ कहती है मेरी बहू मेरी बेटी है, यह सब सुन अंजू की आंखों में आंसू आ जाते थे इस बार दुख के आंसू नहीं सम्मान के आंसू थे
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06/06/2026
सगवानी गांव की मिट्टी में पली बड़ी मैं नेहा हूं| मेरी शादी मेरे घर वाले बड़े अरमानों के साथ दिल्ली का रहने वाला विवान नमक लड़के से की थी| विवान पढ़े लिखे होने के साथ-साथ job भी करता था दिल्ली में | रंग गोरा,पहनवा अच्छा,बोलचाल में मिठास सी आवाज थी उसका ..... नेहा भी कोई काम नहीं थी-सुंदर संस्कारी और मायके से खूब पैसे वाली | शादी के बाद नेहा 10 ही दिन रही होगी अपने ससुराल| खूब प्यार लुटाया जाता उस पर, ऐसा लगता मानो संसार की सारी खुशियां भगवान ने उसे हि दे दिया हो| वह मन ही मन भगवान से कहती कि ऐसा पति सबको दे| कुछ दिन रहने के कारण उसे दिल्ली के प्रसिद्ध कई जगहों का सैर कराया गया| उसके बाद वह मायके अपने गांव आ गई| गांव के आस-पास की औरतें नेहा को कहती, नेहा तुम तो बहुत किस्मत वाली हो जो ऐसा पति मिला है| नेहा यह सुन बहुत खुश हो जाती| 2 महीने मायके में रहने के बाद- विवान का बार-बार कॉल आता कि कब आओगी नेहा कब आओगी| कुछ दिन बाद नेहा का पति विवान उसे अपने साथ दिल्ली ले आया| नेहा के दिल्ली आने के कुछ ही महीने बाद विवान का असली चेहरा सामने आने लगा| छोटी छोटी बातों पे उसे गंदी-गंदी गलियां देता,बिना वजह मारपीट करता और हर समय मानसिक प्रतारना देता| नेहा चुप रहती, क्योंकि उसे उसके माता-पिता ने सिखाया था कि माँ-बाप का मान-सम्मान एक बेटी के हाथों में होता है और औरत का घर बसाता है सहन करने से..... जब वह रोती तो विवान कहता, मेरे पैसे पर पल रही हो जुबान संभाल कर बात करना| नेहा सोचती- कहूं तो किस्से कहूं "अपने दिल की बात" मायके जाऊं तो लोग क्या कहेंगे (इतना अच्छा पति फिर भी नखरे बहुत होगी इसकी) यह सब सोच वह डर जाती है| समय बिताता गया ..... नेहा दो बेटों की माँ बन गई उसे लगा बच्चे के आ जाने के बाद सब ठीक हो जाएगा पर ऐसा नहीं हुआ| विमान बच्चों के सामने भी नेहा को गलियां देता,मारता-पिटाता,चिल्लाता ..... ये सब करने के बाद जब उसका पति घर से बाहर चला जाता, तो नेहा बच्चों को साने से लगाकर खूब रोती और सोचती "मेरे बच्चे ये सब ना सीख ले, बड़े होकर मेरे बच्चे ही मेरा सहारा बनेगा| लेकिन मैं गलत थी क्योंकि बच्चे वही सिखाते हैं जो देखते हैं| सालो बाद बच्चे बड़े हुए.... बेटे भी अपने पिता की तरह गुस्से वाला हो गया l माँ से ऊंची आवाज में बातें करने लगा था l एक दिन नेहा अपने बेटो को अपने पास बैठाया और बड़े प्यार से समझने की कोशिश की ...... तो बेटे ने वही शब्द बोले "जो कभी उसका पिता विवान बोला करता था|" चुप रहो माँ कितना बोलती हो इसलिए पापा से डांट सुनती रहती हो| उस समय नेहा का दिल हज़ारों टुकड़ों में बट गया| उसने कभी ना सोचा था कि मेरे बेटे तक मुझे नहीं समझेंगे.... उसे समझ आ गया की, जिस दर्द को वह बच्चों के लिए सहती रही ,वही दर्द उसने अनजाने में उसे ही मिल रहा है, फिर नेहा अपने आप से सवाल-जवाब करने लगी| अब वह कर भी क्या सकती थी समय तो निकल चला था| अब वह पहले जैसी नहीं रह रही| शरीर कामजोर हो गए थे उसका,पहले जैसी ताकत नहीं रही साहने की, तो उसने चुप रहना ही सही समझी
अब ऐप सब कमेंट करके बताएं कि क्या नेहा ने सही किया या...
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06/06/2026
बिलासपुर नमक शहर में अपने परिवार के साथ माता पिता और दो भाई एक साथ रहते थे बहन ना होने के कारण दोनो भाई माँ को बोला करता, मां मेरे सभी दोस्तों के पास बहने हैं पर मुझे एक भी बहन नहीं है हम राखी किस से बंधवायेंगे मां l क्या जिनकी बहने होती है उसका भाई अच्छा-अच्छा पकवान खाता है l मैं किसकी चोटी खींचुंगा ,किससे झगड़ा करूंगा l यह सब बातें सुन माँ भवुक हो जाती l वह अपने बेटों से बोलती,बेटा तुम दोनों एक दूसरे को भाई बहन समझो या भाई-भाई समझ बात एक ही होगी ना, क्यूकी हर टाइम तुम दोनो झगडते रहते हो और एक दूसरे की डांग खिचाते रहते हो l ऐसी बातें सुन बच्चे हंसते हुए घर से बाहर खेलने चले गए l बिलासपुर का रहने वाला यह परिवार बड़ा ही मेहनती और संस्कारी होने के साथ-साथ अपने बच्चों को अच्छे संस्कार देने की पूरी कोशिश कर रहे थे l दोनों बच्चों के साथ उनके माता-पिता भी बहुत खुश रहते थेl जयो जयो बच्चे बड़े हुए, शहर के महौल में घुल मिल गया, परिवार का बड़ा बेटा विकास, शहर के महौल में जल्दी घुल मिल गया, शहर की आजादी,गलतसंगत और दिखावे ने उसको अपनी तरफ खींच लिया l माता पिता ने संस्कार तो अच्छे ही दिए थे लेकिन शहर के चक्का चौंध में उसके कुछ दोस्त भी बन गए थे l शुरू शुरू में उसने दोस्तों के कहने पर शराब पीना शुरू किया, उसे लगा कि इसमे क्या बुरा है लेकिन धीरे-धीरे यहीं उसकी आदत उसकी जिंदगी पर भारी पड़ने लगा l दोस्ती यारी के चक्कर में पढ़ाई छूट गईl वही दूसरी तरफ परिवार का दूसरा बेटा राहुल अपने बड़े भाई की आदतों को ना सिखा अपने ऊपर ध्यान देता l क्योंकि वह अपने बड़े भाई की गलतियों से सिख लिया था,वह काम बोलता था , मन में पक्का इरादा रखा था कि वह अपने माता-पिता को कभी दुखी नहीं करेगा l वही दूसरी तरफ उस परिवार का बड़ा बेटा विकास अपने माता पिता को हर समय दुखी करता,उसकी गलत संगति और शराब के नशे में डूबा होने के करण उसकी पढाई छुट गई पढाई में मन न लगाता l कुछ साल बाद दोनों भाई बड़ा हुआ विकास जो बड़ा भाई था वह बिजनेस किया
शराब पीने की वजह से वह बिजनेस पर ज्यादा ध्यान ना दे पाया और कुछ महीने बाद बिजनेस में नुक्सान होने लगा l हर बार एक नया बिज़नेस शुरू करता मैं और कुछ साल बाद उसे बरबाद कर नया बिज़नेस शुरू कर लेता था l इस तरह वह जीवन में आगे नहीं बढ़ पा रहा था l बिजनेस में नुक्सान होने की वजह से वह शराब बहुत ज्यादा पीने लगा और घर में आकार क्लेश करता l माता पिता उसे समझाते भी थे लेकिन वह किसी की बात नहीं सुनता, शराब ने उसकी सोच और भविष्य दोनों को अँधेरे में ढकेल दिया था l समय बिताता गया,बड़ा भाई पूरी तरह नशे का शिकार हो गया उसकी सेहत खराब रहने लगी और समाज में उसकी इज्जत भी कम होने लगी l माता पिता की आँखों में हर समय चिंता और दर्द रहता था विकास के लिए l वही दूसरी तरफ छोटा भाई राहुल यह सब कुछ देख रहा था उसने अपने बड़े भाई विकास की गलतियों से बहुत कुछ सीखा था वह कम बोलता था लेकिन मन ही मन पक्का इरादा रखता था की, वह अपने माता पिता को दुखी नहीं करेगा, पढाई पर ध्यान, देता,मेहनत करता और बड़ों का सम्मान करता l अपनी कड़ी मेहनत की वजह से छोटा बेटा राहुल को एक अच्छा नौकरी मिल गया l उसने अपनी इमानदारी और मेहनत से समाज में नाम कमाया l लोग उसके माता-पिता को सम्मान देने लगे थे और कहते थे आपने बहुत अच्छे संस्कार दिए हैं अपने छोटे बेटे को l ऐसी बातें सुन माता पिता का सीना गर्व से चौरा हो जाता l राहुल ने अपने माता-पिता को हर सुख सुविधा दीया और नाम रोशन किया l यह सब देख बड़े भाई विकास को अपनी गलती का एहसास होने लगा, जहां बैठता एक ही बात सोची कि गलत संगत और बुरी आदतों से इंसान धीरे-धीरे बरबाद हो जाता है और सही रास्ता,मेहनत और संस्कार ही जीवन को तरक्की की ओर ले जाता है l मेरी जिंदगी मैंने खुद अपने हाथों से बर्बरता कर लीl इस घर का बड़ा बेटा होने के कारण मुझे सारी जिम्मेदारियां उठाना चाहिए था लेकिन मेरा छोटा भाई सारे जिम्मेदारियां उठा रखा है मुझे अपने आप पर शर्म आ रही है l यह सब सोच वह रो पड़ा, उसे शर्म आती अपने छोटे भाई और माता पिता से l विकास ने भी अपने मन में संकल्प लिया कि अभी भी देर नहीं हुई अब वह ऐसा कोई काम नहीं करेगा जिसकी वजह से उसके माता-पिता और उसके परिवार वाले को शर्मिंदा होना पड़े l वह अपने आप को धीरे-धीरे सुधारने लगा l कुछ साल बाद विकास भी एक अच्छा बिजनेसमैन बन गया l लोग उसकी तारीफ करते नहीं थकते थे माता-पिता को भी अब कोई चिंता ना थी l क्योंकि उनका दोनों बेटा अब सही रास्ते पे थे
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धन्यवाद पुरी कहानी को पढ़ने के लिए🙏
30/03/2026
तारा और अनिकेत दो वर्ष से एक दूसरे से प्यार करते थे पर घर में किसी को कोई खबर ना थी क्यूकी अनिकेत डरता था कहीं अगर मेरे माता-पिता को हमारे प्यार के बारे में पता चला तो क्या सोचेंगेl सही समय आने पर मैं खुद अपने माता-पिता से बात करूंगाl जब अनिकेत तारा से मिलता यहीं कहती तारा -कब बात करोगे अपने घर वालों से अनिकेत हमारी शादी की .......l अनिकेत यहीं कर कर टाल देता है कि कुछ दिन और रुक जाओ l एक दिन दोनों पार्क में बातें करते देख तारा की मां गुस्से से आग बबूला हो गईl वह घर आकर सारी बात बताई अपने पति को ...पति ने कुछ सोचा ना समझा चला गया अपने दोस्त रवि के पास और कहां रवि अब पानी सर से ऊपर चला गया है.....l तुम्हारा बेटा और मेरी बेटी एक साथ दिखती है जो मुझे बिल्कुल नही पसंद हैl ईससे पहले कि तुम्हारी और मेरी बदनामी हो उन की शादी करा देते हैं..... रवि ने कहा कर दीl क्योंकि बचपन से जानते थे अपने दोस्त और उनके परिवार वालों को..l कुछ महींने बाद दोनो की शादी हो गईl सब ठीक चल रहा था अनिकेत और तारा खुश थे अपनी शादी से...3 साल बीत जाने के बाद तारा और अनिकेत हर समय चिंता करते रहते थे घर में सारी खुशियां होने के बावजूद भी एक बच्चे का इंतजार हो रहा थाl कई साल बीत गए पर घर के आंगन में कीलकारी गुंजी नहीं रही थी... तब दोनो ने डॉक्टर से मिला डॉक्टर ने अनिकेत में कमी बता दियाl अनिकेत अब हर समय सोचता रहता है.. मेरी वजह से तारा मां नहीं बन सकती,हम दोनों औलाद का सुख नहीं भोग पाएंगेl पर एक दिन तारा ने अपने पति अनिकेत को बड़े प्यार से समझा चिंता मत करो बहुत सारी सुविधाएं हैं मां बनने के... दोनो मिलकर एक बच्ची को गोद ले लियाl बच्चे का नाम रखा "काव्या"l तारा और अनिकेत काव्या को पाकर बहुत खुश रहते थेl अच्छे परवरिश के साथ अच्छे संस्कार दे रखे थे अपनी बच्ची काव्या कोl काव्य बचपन से ही बहुत सुंदर और होशियार थीl वह अपने मां बाप की इकलौती संतान होने के करण घर में उसे बहुत प्यार दुलार मिलता थाl उसके माता-पिता काव्या की हर छोटी बड़ी जरूरतों को ध्यान रखते थेl काव्या भी अपने माता-पिता की बहुत इज्जत करती थीl और पढाई में हमेशा अच्छा प्रदर्शन करती थीl धीरे-धीरे समय बिता गया.... समय के साथ काव्या बड़ी होने लगी l वह स्कूल में बहुत अच्छी छात्रा थी उसके शिक्षक काव्या की तारीफ करते हैं नहीं थकते थे और दोस्त भी उससे बहुत प्यार करते थे काव्या का सपना था कि वह बडी होकर अपने माता-पिता का नाम रोशन करे लेकिन एक दिन उसकी जिन्दगी मे एक ऐसा मोड आया जिसने सब कुछ बदल कर रख दिया काव्या की मुलकत एक ऐसी व्यक्ति से हुई जिसने मीठी-मीठी बाते करके उसका विश्वास जीत लिया उसे लगने लगा की वही उसका सच्चा दोस्त है शुरुआत में सब कुछ अच्छा लग रहा था लेकिन धीरे-धीरे काव्या को अहसास हुआ की हर व्यक्ति वैसा नहीं होता जैसा वह दिखता है उस दिन से वह थोड़ा टुट गई लेकिन खुद को सम्भलते हुए अपनी पढाई पुरी करी तारा ने अनिकेत से कहा काव्या बडी हो रही है कोई अच्छा सा लडका खोजो उसके लिए.... २५ साल साल की हो चुकी है काव्या कुछ ही महिनो बाद उसकी शादी करा दी गई जब काव्या की शादी हुई तो उसके रिश्तेदार और समाज के लोग कहने लगे लड़की भाग्यशाली है ससुराल अच्छा मिला है घर बड़ा, पढ़ा लिखा पति, संस्कारी परिवार, लेकिन किसी ने काव्य से नहीं पूछा कि वह क्या चाहती है और उसके मन में क्या चल रहा है ससुराल में कदम रखते ही काव्या ने अपने सपने मायके में ही छोर दि थी वह अब बेटी नहीं बहु थी किसी घर की .... सुबह उठते ही नई आवाज उसके कानों में सुनाई देती है बहू चाय अभी तक नहीं बनी क्या..... यह तुम्हारा ससुराल है मायका नहीं है हमारे यहां ऐसा नहीं होता काव्या कान खोल कर सुन लो आज ही काव्या मुस्कुराइ उसे उसकी मां ने सिखायी थी कि बहू मुस्कुराती है जवाब नहीं देती कुणाल जो काव्या का पति था वह अच्छा इंसान था जो .....आगे की कहानी के लिए मुझे comments करें 🙏
14/03/2026
धनौली गांव का रहने वाला परिवार पति राजकुमार और पत्नी दुर्गेश्वरी देवी के साथ उनकी पांच बेटियां और साथ में एक प्यारी सी दादी रहती थी अपनी बेटियों का नाम प्यार से लक्ष्मी, सरस्वती, पार्वती, जानकी, और सबसे छोटी बेटी का नाम गौरी रखा थाl परिवार बड़ा था पर घर छोटा था और आमदनी भी सिमित थीl बेटियों के सपने भी बड़े बड़े थेl इसलिए पिता राजकुमार खूब मेहनत करते थेl पिता अपनी बेटियों को बहादुर और निडर बनाने की कोशिश करतेl माँ दुर्गेश्वरी भी कम ना थी घर संभालते हुए अपने पांचों बेटियों को अच्छे संस्कार के साथ अच्छी परवरिश दे रही थीl कुछ पडोसी ताने देते, इतना बड़ा परिवार और बेटियां 5 कैसे पालेगीl शादी ब्याह में खर्च कैसे करेगीl आमदानी तो इस परिवार की सुमित है और जमाना भी खराब है किसी के साथ इनकी बेटी भाग गई तो किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं रहेगीl यह सब सुन दुर्गेश्वरी घर के अंदर चली जाती है पर किसी को कुछ ना कहतीl समय बीतता गया बिटिया बड़ी हो गईl पिता को लगता बिटिया मेरी ताकत है पापा की ऐसी शब्द सुनकर बेटीयो को अपने पापा पर बड़ा ही प्यारा थाl उनकी मेहनत देख सभी बेटियां छुप कर रो रोती थी और साथ रहने की कसमें खातीl बड़ी बेटी लक्ष्मी शांत सुंदर और व्यवहारिक थीl सबसे बड़ी होने के कारण सबसे पहले उसी पे ज़िम्मेदारी आई थीl मां की कामों में हाथ बटाती, साथ ही बच्चों को पढाती, खुद भी पढाई करती और फॉर्म भरती जॉब के लिएl खर्चे ज्यादा होने के करण फॉर्म भरने तक के पैसे नहीं होते लक्ष्मी के पासl कॉलेज भी बहुत दूर होने के कारण साइकिल से ही जाती आतीl खुद की पढ़ाई, बच्चों को ट्यूशन और मां के साथ घर का काम, ऐ सब कर वह थक जातीl जब रात को सोती, उसके दिमाग में उसके पापा का प्यार दिखता और वह किताब खोल पढ़ने बैठ जाती ताकि कोई अच्छा सा काम मिल जाए तो आर्थिक मदद कर सके अपने पापा की दूसरी बेटी सरस्वती जो हार ना मानने वाली लड़की थीl कभी सरस्वती सपने देखने वाली.. साथ डरी हुई लड़की थीl लेकिन अब मजबूत और बहादुर सी लड़की थीl सरस्वती का कॉलेज दूर था बस का किराया तक नहीं था देने को l बड़ी बहन की किताब लेकर पढ़ाई की थी जब पूरी तरह थक कर घर आती तो उसकी माँ उसकी माथा चुमकर कहती एक कदम और चल ले बेटीl ऐसी बात सुन उसे ताकत सी आ जातीl तीसरी बेटी पार्वती शांत, काम बोलने वाली, जिसका सपना था डॉक्टर बनने काl पार्वती का बचपन से ही मेडिकल लाइन में जाने की इच्छा थीl एक बार एड्रेस में फेल भी हो गई थी उस दिन बहुत रोई थीl मां और दादी समझती बेटा हौसला रख एक इम्तिहान में फेल हो गई तो क्या हुआ.. अगली बार पास जरूर हो जाओगेl पार्वती मेहनत जरी रखा l पुरानी किताबें, नोटस उधर लिया और कई रातों तक नहीं सो पाई... घंटो घंटो पढाई करतीl चौथी बेटी थी जानकी जिसके सबसे ज्यादा सपने थेl अंग्रेजी के साथ-साथ आत्मविश्वास भी कम थी उसके....लोग मजाक उड़ाते थे जानकी की l इसलिए वह रोज आईने के सामने खडी होकर बोलने की कोशिश करती,यूट्यूब से सीखती बहुत गलतियाँ भी करती फिर भी कोशिश करती रहती थी माँ-पापा का संघर्ष देख वह रो पडतीl पापा को रात-रात भर जगते देख भगवान से कहती हे भगवान मेरे माता-पिता का दुख कब दुर करोगेl फीस, फॉर्म, कोचिंग काम.. यह सब एक साथ कैसे होगा सोचती रहती l मां मुस्कुराती और कहती तुम सब क्यों चिंता करती हो हमसे जितना हो पायेगा उससे ज्यादा करेंगे सबके लिये ......आगे की कहानी के लिए मुझे कमेंट करें
13/03/2026
सुकोली गांव की रहने वाली मैं शर्मिला गुप्ता हूं मैं बहुत सीधी हूं जो जैसा कहता वैसा करने वाली , अपना दिमाग कम इस्तेमाल करने वाली हूं मेरे साथ दो भाई एवम दो बहने भी रहती थी मैं अपने माता-पिता की नजरों में सबसे ज्ञानी, समझदार बेटी थी l क्योंकि मैं पढ़ने लिखने में काफी अच्छी होने के कारण मेरे आस-पास की कुछ औरतें काना फूसी करती कि काश ऐसी लड़की मेरे बेटे के लिए मिल जाए तो अच्छा होता l मेरे माता-पिता ने हम पांचों भाई बहनों को जितना हो सका पढ़ाया लिखायाl कुछ वर्षों बाद मेरी दोनों बहनों की शादी हो गई l भाई दोनों अपना-अपना बिजनेस शुरू कर लिया सब ठीक चल रहा था l पर एक दिन अचानक पिता जी की मृत्यु हो गई मेरी मां अकेली पड़ गई, हर समय मेरे बारे में सोचती रहती कि इसका विवाह कैसे होगा यह ससुराल में कैसे रह पायेगी l मां को मैं बहुत समझती पर वह मेरे बारे में ही हर समय सोचती रहती थीl पिता जी के गुजरे कुछ ही महीने हुआ थे की दोनों भाई अलग हो गएl घर का बंटवारा हो गया l माँ पे मानो दुखों का पहाड़ टूट पड़ीl मेरी शादी की चिंता कम थी कि अब घर की चिंता बढ़ गई थी उनको l सुकोली गांव के पास ही एक गांव कटवानी का रहनेवाला एक लड़के से मुझे प्यार हो गया l कुछ ही महीने बीते थे कि हम दोनों को समझे l अचानक एक दिन विजय (जिसे मैं प्यार करती थी) की मां मेरे घर आए अपने बेटों के साथ मेरा हाथ मांगने के लिए l अच्छा घर परिवार देख मेरी शादी के लिए हाँ कर दी मेरी मां ने l कुछ महीनों बाद मेरी शादी विजय से हो गई और मैं कटवानी गांव में अपने ससुराल वालों के साथ रहने लगीl कुछ ही समय बीते होंगे की मेरी स सासु मां का व्यवहार हमारे प्रति बदलने लगा l मेरी जेठानी मुझे बहुत प्यार करती, मैं भी उनका आदर सम्मान करती, हर बातें हम सब एक दूसरे से शेयर करते l ये सब देख मेरी सास को जलन होती l उनको लगता है कि अगर मेरी बहू साथ रहेगी तो मेरा प्यार, मान-सम्मान और महत्व काम हो जाएगा l बस यहीं से उनके अंदर जहर घुलने लगा घर तो ज्यादा बड़ा नहीं था पर मेरे सासु माँ का अहंकार बहुत बड़ा था l उन्हें लगता है घर में जो भी हो वह सही है बहुओं को हर समय टोकाती रहती कि यह गलत है यह सही है l हम बहुये सुबह से रात तक घर के सारे काम करती फिर भी सासू माँ को संतोष ना होता l मेरे जमाने में हम ऐसा करते थे, तुम्हें कुछ नहीं आता,मेरे बारे में कोई नहीं सोचता l हर बात में खुद को सही मानती l सच कहूं तो मेरी सासुमा को हमारे प्यार नहीं दिखता l हम लोगों की मेहनत, मन की हालत और हमारी तक़लीफ़ कुछ भी नहीं दिखाती उनको l मैं चुप- चाप सब सहती रही l पति भी माँ के डर से ज्यादा कुछ बोल नहीं पाता l घर में हर दिन नोकझोंक,ताने और कडवे शब्दों का माहौल बना रहता l धीरे-धीरे मैं बीमार होने लगी मेरी समझदारी यहां काम नहीं कर रही थी l एक दिन मुझे चक्कर आया और मैं बेहोश हो गई l डॉक्टर ने साफ़ कहा "बहू का मानसिक तनाव बहुत ज़्यादा है अगर महौल नहीं बदला तो हालात और बिगड़ सकते हैं"l उस दिन मेरी सास माँ चुप रही l रात में उन्हें नींद नहीं आई और उन्हें याद आया कि वह भी कभी बहु हुआ करता थी कैसे उनहोने भी सब सहा था l फिर इन्हो ने सोचा अगर मेरी वजह से घर टूट जाए तो ये अच्छी बात ना होगी गांव समाज क्या कहेगा मुझे l अगले दिन मेरी सास सभी बहुओं को अपने पास बैठाया और भारी मन से कहा-बेटी मुझसे गलती हो गई तुम सब मुझे माफ कर देना मैं सिर्फ अपने बारे में ही सोचती रहती l तुम लोगों का दर्द नहीं समझ पाई l उनकी बातें सुन हम बहुओं की आंखों से आंसू बह निकले, दुख के नहीं सुकुन के l उस दिन के बाद मेरी सास बदल गई l अब वह हमे अपनी बेटी जैसी प्यार करती और समझने लगी l पहले जैसा घर में फिर से हंसी लौट आई सब खुशी-खुशी रहने लगे
28/02/2026
एक सफल बिजनेसमैन अपने पिता की मृत्यु के बाद उनका सामान समेट रहा था। अलमारी के एक कोने में उसे पिता की एक पुरानी डायरी मिली। उसे याद आया कि बचपन में जब भी वह कुछ गलती करता, पिता उसे डांटते थे और फिर अकेले में इस डायरी में कुछ लिखते थे। बेटे को हमेशा लगता था कि पिता उसकी कमियाँ लिख रहे हैं।
उसने डरते हुए डायरी खोली। पन्ने पलटे तो उसकी आँखें भर आईं।
डायरी के एक पन्ने पर लिखा था: "आज मेरे बेटे ने अपनी टूटी हुई साइकिल खुद ठीक करने की कोशिश की। वह थक गया था, पर उसकी आँखों में जो चमक थी, वह मैंने पहले कभी नहीं देखी। मुझे गर्व है कि वह आत्मनिर्भर बन रहा है।"
एक और पन्ने पर लिखा था: "आज बेटे का रिजल्ट आया। नंबर कम थे, वह दुखी था। मैंने उसे बहुत डांटा क्योंकि मैं चाहता था कि वह और मेहनत करे, पर बाद में मेरा दिल बहुत रोया। काश मैं उसे गले लगाकर कह पाता कि नंबरों से ज्यादा वह मेरे लिए कीमती है।"
डायरी के आखिरी पन्ने पर, जो पिता ने अपनी मृत्यु से कुछ दिन पहले लिखा था, लिखा था: "आज मेरा बेटा मुझसे मिलने आया। वह बहुत बड़ा आदमी बन गया है। उसने मुझे एक महंगा फोन दिया, पर मेरा मन बस यह सुनने को तरस रहा था कि 'पापा, क्या आपको याद है हम बचपन में बारिश में कैसे भीगते थे?' वह व्यस्त था, और मैं उसे परेशान नहीं करना चाहता था। बस उसे खुश देखकर ही मेरा दिल भर आता है।"
बेटा फूट-फूटकर रोने लगा। उसे अहसास हुआ कि जिसे वह 'सख्त पिता' समझता था, उनके सीने में उसके लिए कितना अथाह प्रेम और गर्व छुपा था।
सीख आपके लिए--: हमारे माता-पिता की खामोशी और डांट के पीछे हमेशा सुरक्षा और प्रेम छिपा होता है। समय रहते उनके उस अनकहे प्यार को पहचानें, क्योंकि समय निकल जाने के बाद केवल यादें और पछतावा रह जाता है।
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19/02/2026
रांची के एक छोटे से शहर की रहने वाली कमली गुप्ता और अयान ठाकुर कॉलेज फ्रेंड थेl दोनो मात्रा तीन महीने पहले ही मिले थेl कमली का चेहरा हसमुख, जल्दी किसी के साथ जुड़ने वाली और कॉलेज में बेस्ट स्टूडेंट थीl वही अयान ठाकुर सीधा- सादा, जिम्मेदार और गरीबी को बहुत नजदीक से देखा हुआ लड़का थाl पढने लिखाने में अपने कॉलेज का टॉपर छात्र था साथ ही परिवार, पढाई के साथ, भविष्य सब कुछ तय था उसकाl कमली गुप्ता और अयान ठाकुर थे अलग लेकिन कुछ बातें उनसे मिलती जुलती थी वह है खालीपन....l दोनो बस स्टैंड पे मीले थे... कमली गुप्ता बस का इंतजार कर रही थी l एक घंटे लेट आने की वजह से वह चिड गई थी तभी बस आती है वह गुस्से में बस में चढ़कर खूब सुनती है अयान को l अयान समझ नहीं पाता कि यह लड़की मुझे क्यों डांट रही है l थोड़ी देर बाद गुस्सा शांत होने पर कमली सॉरी बोलती हैl दूसरी मुलाकात कॉलेज में होती है और हंस पडते हैं कमली सॉरी बोलती है ऐसे लगतार दोनो की मुलाकात होती रहती थीl उसी मुलाक़ात में बात- चीत बढ़ाने लगीl साधारण सी बात-चीत से कब आदत बन गई दोनों को पता ही नहीं चलाl अब रोज फोन पर बातें होती थी l फिर कभी बात ना हो तो बेचैन होने लगते थे दोनोंl देखते ही देखते कब प्यार में बदल गया किसी को पता ही नहीं चलाl कमली हर छोटी बड़ी बातें अयान से शेयर करने लगीl अपनी खुशी, अपना गम, घर में क्या हो रहा है सब बतातीl दुख अयान के बिना सह नहीं पाती l अयान भी कमली का परवाह (देखभाल) करता थाl लेकिन अयान प्यार को समझदारी और संतुलन से समझता पर कमली अपने प्यार को पूरी दुनिया समझ बैठी थीl समय के साथ कमली का प्यार अयान के लिए बढ़ता चला गया और धीरे-धीरे उम्मीद भी बढ़ाने लगीl सोशल मीडिया पर कमली घंटो रहती,अयान से चैटिंग करती ,घर की सारी बातें शेयर करती -कब खाया कल क्या करेगी .......सबl अयान का message आते ही तूरंत जवाब देती l हर परेशानी में सिर्फ वही याद आताl कोई राय-मशवरा में उसकी सहमती ज्यादा होता थाl कमली की ऐ आदतें अयान को अच्छा लगता लेकिन धीरे-धीरे उसे घुटन सी होने लगीl घर वालो को जब पता चला कि कमली किसी लड़के को चाहती है तो घर में मानो भूकम्प आ गया हो...माँ डर गई और उसके पापा की आवाज में गुस्सा तो था ही बेबसी भी थीl कमली को साफ-साफ बोल दिया पापा ने उसे यहां हमारा घर है कोई फिल्मी थिएटर नहीं, लोग क्या कहेंगे रिश्तेदार क्या सोचेगेl समाज में कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं छोडी हमे तुमने कमली......ईसी दिन के लिए हमने पाला था तुम्हें क्याl कमली चुपचप सब सुन रही थी क्योंकि उ से एकिन था कि सब समय के साथ ठीक हो जाएगाl एक समय ऐसा आया कि अयान ने कमली से बोला- कमली मुझे थोड़ा टाइम चाहिए..l यह सब सुन कमली का दिल टूट गयाl वह सोचने लगी टाइम क्यों चाहिए हम दोनों प्यार तो करते ही हैं बस शादी कर सब का मुंह बंद कारवाना चाहते हैंl उस रात कमली बहुत रोई, इसलिए नहीं कि अयान को थोड़ा समय चाहिए बल्की इसलिए कि घरवाले क्या सोच रहे हैं उसके बारे में l कुछ दिन दुरिया बढ़ आई कमली अयान से न झगडी, ना नफ़रत की, बस वो खामोश हो गईl घर वाले ताने देते पर वह चुपचाप रहती है इस तरह 15 दिन गुजर गया l ना कमली का कॉल आया, ना कोई मैसेज आया, ना ही कोई मुलाकात हुई अयान को l तब एहसास हुआ उसकी सारी खुशियां कमली पर ही टिकी थीl काफी वक्त बाद दोनों मिलेl अयान कमली को सॉरी बोला और कहा मैं तुम्हें खोना नहीं चाहता हूं, पर मैं क्या करता मेरे घर वाले राजी नहीं तुमसे शादी को लेकर l उनहोने पहले ही मेरे लिए लड़की देख रखी है मैं क्या करूं l तुम्हारे मम्मी पापा भी तैयार नहीं है इसके लिए l वह तुम्हारे लिए लड़का ढूंढ रहे हैं मुझसे एक बार मिले भी थे, साफ-साफ बोला था कि मेरी बेटी से दूर ही रहना l मैं क्या करता तुम ही बताओ कमली...l कमली के चेहरे पर मुस्कान आई l वह बोली घबराओ मत हम दोनों हमेशा साथ रहेंगे..l तुम मेरे घर वालों की चिंता ना करो मैं सब देख लुंगी और मुस्कुराने लगीl एक सुबह कमली अयान के साथ भाग कर शादी कर ली दोनों एक हो गए और खुश रहने लगेl शुरुआत में सब अच्छा लग रहा था दोनों कोl एक कमरा किराए पर लिया थाl कमरा छोटा था और उसमें एक पंखा थी वह भी बहुत पुरानी थी पर दोनों का दिल सपनों से भरा था l कमली सोचती पैसा नहीं हुआ तो क्या हुआ प्यार कभी कम ना होगी हम दोनों की...l 1 साल ही बीते होंगे हंसी खुशी से उन दोनों का जीवन,उसके बाद एक-एक पैसे की लड़ाई होने लगी...यह क्यू नहीं लाये, वो क्यों नहीं दिलाये, आज राशन नहीं है, घुमाने क्यों नहीं ले जाते मुझे, ये सारी शिकायतें होतीं थी कमली की अयान से.......l कमली की मां अब हर समय उसका इंतजार करतीl जिस दिन पता चला कि हमारी बेटी किसी लड़के से प्यार करती है तो वह डरे हुए थे, गुस्सा तो बस दिखाने के लिए थाl मन रात भर सोचती और रोटी करवटें बदलती रहती है, दोनों यहीं सोचते हैं कि दुनिया बहुत कठोर है कैसे सामना करेगी मेरी बेटी कमलीl पापा चुप चाप उसकी राह देखते रहते थे वह हर समय सोचते रहते कि प्यार से ज्यादा जिंदगी जीना मुश्किल होता है,हम बोलते रहे वह सुनती रही लेकिन कभी हम उसकी आंखों में नहीं थे वहां सिर्फ उसका प्यार था और एक रात वह चली गई हम दोनों को छोड़ कर l थोड़ी देर के लिए नहीं सोचा कि मेरे बिना मेरे मां बाप का क्या होगा? आज भी उसका कामरा, कपडे, तकिया, अलमारियाँ सब वैसा ही था मां रोज उसके कमरे में झाड़ू लगाती थी जैसे वह अभी भी आ जाए कुछ महीने बाद पता चला था कि दोनों किराय के मकान में रहते है...l बहुत परेशान रहती होगी, पैसे नहीं होंगे उसके पास, मां ने कितनी बार कमली के पापा से बोली थी चलो उसे घर वापस बुला लेते हैं..पर पापा हर बार बोलते हैं अगर लोटना चाहेगी तो खुद लौट जाएगी, पर सच यह था कि वह रोज इंतजार करते थे लौटने का l दिन बितते गए अयान की नौकरी कभी लगी कभी छुटी और पैसा चढ़ता चला गया..l दूध भी उधार आने लग गए थेl कमली कभी मेरे सामने रोती थी लेकिन अब बच्चों के सामने मुस्कुराती थीl मां को जब पता चला था तब वह रो पड़ी थी मेरी बेटी मां बन गई और मैं उसके पास नहीं थी पापा ने दीवार की तरफ मुंह कर (आंखों से) आंसू टपक जाते थे पता नहीं वाह ठीक से खा पाती होगी या नहीं बच्चों को सर्दी तो नहीं लगती होगी उसे सोचते रहते उसकी मम्मी पापा ....l समय बिताता गया कमली एक रुपये के लिए उपयोग दूसरे लोगों के सामने हाथ फेल होते थे आज उधार दे दो कुछ दिन में चुका दूंगी बच्चे भूखे हैं रात को जब बच्चे सो जाते कमली चुपचाप रोती थी कभी अपने मां की गोद याद आती, तो कभी पापा का कठिन सुरक्षित साया याद आती, यह सब सोच फिर से रोने लगतीl वह यहीं सोचती है कि गलती मैंने की है तो मुझे ही इसकी सजा मिल रही हैl कुछ दिनों बाद गरीबी के साथ-साथ रिश्तों में भी खटास आने लगी l अयान अब चिड़चिड़ा रहने लगा थाl प्यार की जगह ताने देने लगा थाl अगर घर से भागी ना होती तो यह दिन देखना नही पड़ते हमे, तेरे फैसले की सजा मैं क्यों भुगतू बता...l कमली हर बात पर चुप रहती क्योंकि उसके पास ना पैसा था, ना मायका था और ना ही ससुराल ,कहीं जाने की जगह उसे नजर नहीं आ रही थीl और मन में कई सवाल चल रहे थे बच्चों को लेकर... एक दिन ऐसी हालत हो गई थी कि बच्चों के लिए दवा भी नहीं थी, पूरी रात जगी बच्चों को देखते-देखते ..उसके अंदर से एक आवाज आईl सुबह उठी घर का सारा काम खत्म कर बच्चों को एक नजर देखा फिर अयान की तरफ देखा जो अभी तक सो रहा था..बिना किसी से कुछ कहे चली गई l फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा क्योंकि अगर देख लेती तो वह टूट जाती....l किसी महिला द्वारा पता चला कि कमली अपने बच्चों और पति को छोड़कर कहीं चली गई है तो मां जमिन पे बैठ गई और रोने लगी मेरी बेटी इतनी मजबूत कैसे हो गईl पापा पहली बार टूटे थे ... हमने उसे डांटा था छोरा नहीं था घर में उसकी तस्वीर देख माता पिता रोने लगे थेl
10/02/2026
बरसों पहले की बात है। शहर से दूर, पहाड़ियों के बीच एक छोटा-सा गाँव था — पालमपुर l गाँव छोटा था, लेकिन एक चीज़ बहुत बड़ी अजीब थी… एक पुराना, टूटा-सा घर, जिसके बारे में कहा जाता था कि वहाँ कोई आज भी रहता है। कोई उसका नाम नहीं लेता था। बस कहते थे — “रात को उधर मत जाना… वहाँ रोशनी दिखती है।” बड़े बुजुर्ग अपने बच्चों को वहा खेलने जाने नहीं देते थे.. शरद कनु नाम का लड़का जो शहर में पढ़ता था। दिमाग से तेज और बहादुर होने के साथ-साथ मजबूत भी था l फौज में होने के कारण छुट्टियों में गाँव लौटा, लेकिन इस बार उसकी जेब खाली और आँखों में चिंता थी क्योंकि उसकी माँ बीमार होने के कारण उसके पास इलाज के पैसे नहीं थे। गाँव में सिर्फ एक ही जगह थी जहाँ सस्ता कमरा मिल सकता था — वही पुराना घर। गाँव वालों ने मना भी किया शरद को “बेटा, वहाँ मत रहो… वो घर ठीक नहीं तुम्हारे लिए।” लेकिन वह मुस्कुरा दिया। “डर से पेट नहीं भरता काका।”ऐसा बोल l वह उस घर में रहने चला गया। वो घर बहुत सालो से बंद होने के कारण डरावनी तो थी लेकिन रोशनी दूर तक नहीं थी फिर भी वह उस घर की सफ़ाई करी पहली रात कुछ अजीब हुई उसके साथ.. घर में बिजली नहीं थी, लेकिन आधी रात को अचानक एक दीया जल उठा। शरद की नींद खुली। कमरे में हल्की-सी रोशनी थी और एक औरत बैठी थी उसके पास— सादा साड़ी, आँखों में गहरा सुकून। वो डरी नहीं लगा रही थी। वो… उदास लग रही थी। उस औरत ने धीरे से कहा — “डर मत… तुम भी यहाँ मजबूरी में आए हो, है ना?” शरद का गला सूख गया। लेकिन अजीब बात ये थी की उसका दिल शांत था। अगली कई रातों तक वो औरत आती रही। उसका नाम था नीलिमा l बरसों पहले वो इसी घर में रहती थी। पति फौज में था। हर रात वो दीया जलाकर उसका इंतज़ार करती थी। लेकिन एक दिन खबर आई की उसका पति शहीद हो गया है और गाव वाले ने उसका साथ नहीं दिया बल्की गाव वालो ने उसे अकेला छोड़ दिया । उसका इंतज़ार खत्म नहीं हुआ… और उसी इंतज़ार में उसकी ज़िंदगी भी.... वो मर गई, लेकिन मरने के बाद भी उसका इंतज़ार ज़िंदा रह गया। एक रात शरद रो रहा था। की अचानक नीलिमा ने पूछा — “क्यों रो रहे हो?” शरद बोला — “माँ बहुत बीमार है… पैसे नहीं हैं।” नीलिमा कुछ देर चुप रही । फिर उसने कहा — “कल सुबह पुराने पीपल के पेड़ के नीचे देखना।” इतना कहकर वह ..... अगली सुबह वह गया और देखा वहाँ एक पुराना संदूक था। उसमें कुछ गहने और एक आखिरी चिट्ठी रखी थी लिखा था “अगर कोई इस घर में मजबूरी में आए, तो मेरी तरफ़ से ये उसकी मदद है।” ये सब देख शरद की आखें भर गई इलाज हुआ। माँ बच गई। शरद उस घर को छोड़ने आया। उस रात नीलिमा आखिरी बार आयी थी। उसने मुस्कुराकर कहा — “अब मेरा इंतज़ार पूरा हुआ।” दीया धीरे-धीरे बुझ गया। उसके बाद उस घर में फिर कभी रोशनी नहीं दिखी। आज भी पालमपुर के लोग कहते हैं — “कुछ भूत डराने नहीं आते… कुछ सिर्फ़ अधूरे काम को पूरा करने के लिए रुक जाते हैं।” शरद हर साल उस गांव में जरूर आता l वो हर साल उस घर के सामने एक दीया जला जाता । क्योंकि "कुछ रोशनियाँ मरकर भी बुझती नहीं" उसका कहना था
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